सिविल कोर्ट सेंट्रल बार एसोसिएशन के महामंत्री दारोगा सिंह व अधिवक्ता सुशील सिंह सहित उनके परिवार के आठ लोगों पर सरायलखंसी थाने में दलित उत्पीड़न सहित लगे विभिन्न अन्य मुकदमे से गुस्साए अधिवक्ताओं ने गुरुवार को बैठक कर पुलिस की कार्यप्रणाली की निंदा की। इस दौरान प्रस्ताव पास कर विरोध स्वरूप पूरे दिन न्यायिक कार्य से विरत रहे।
संघ के पुस्तकालय भवन में हुई बैठक में दर्ज मुकदमों को फर्जी करार देते हुए पुलिस की निंदा की। अधिवक्ताओं ने मुकदमे को खत्म करने आैर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की।
इस मौके पर आनंद पांडेय, तनवीर अहमद, घनश्याम सिंह, दिनेश्वर राय, सत्येंद्रनाथ राय, दिनेश सिंह, लक्ष्मीकांत यादव, जयप्रकाश यादव, हरिनंद चौहान, प्रमोद साहनी, अश्वनी सिंह, शशि प्रकाश सिंह, ऋषिकेश सिंह, जगरन्नाथ सिंह, अमरनाथ सिंह, निर्मला यादव, चंद्रशेखर राय, राजेश राय, शिवप्रसाद श्रीवास्तव, राकेश मिश्रा, रामकृत यादव, मानसिंह यादव, जितेंद्र पांडेय, मनोज पांडेय,अरुण यादव आदि अधिवक्ता शामिल रहे।
बता दे कि सरायलखंसी थाना क्षेत्र के किन्नूपुर गांव निवासी चमेली देवी पत्नी मूलचंद की तहरीर पर एससी एसटी ऐक्ट के अलावा बल्वा, आगजनी, छेड़खानी सहित कई अन्य धाराओं में दारोगा सिंह, उनके पुत्र सत्यम सिंह व शिवम सिंह, अधिवक्ता सुशील सिंह, जयनाथ सिंह, रामलक्ष्मन सिंह, गुलाब सिंह व सत्यानंद सिंह को आरोपी बनाया गया है।