आजादी के बाद भी गांवों की दुर्दशा जस की तस है। गांवों में भी योजनाओं में भ्रष्टाचार का दीमक लग गया है। जनप्रतिनिधि अपनी ही जेब भरने में लगे हैं।
ऐसे में पंचायत चुनाव में अब हर कोई बदलाव चाह रहा। इसकी बागडोर संभाली है युवाओं ने। दूसरे चरण के 2681 प्रत्याशियों में आधे से अधिक युवा प्रत्याशी हैं। इनके इस उत्साह के चलते ही मतदान प्रतिशत भी बढ़ रहा है। द्वितीय चरण के बड़रांव एवं घोसी ब्लाक में युवा प्रत्याशियों की जहां लंबी फेहरिस्त देखी गई, वहीं युवा मतदाता भी उत्साहित नजर आए।
प्रथम चरण के मतदान के बाद मंगलवार को बड़रांव एवं घोसी ब्लाक में मतदान मंगलवा को हुआ। द्वितीय चरण में 253565 मतदाता एवं 2681 प्रत्याशी भाग ले रहे हैं। दोनों ब्लाकों में प्रधान के 144 एवं सदस्य के 1806 पद हैं। इन प्रत्याशियों में अधिकांश की उम्र 30 से लेकर 40 हैं।
हालांकि इससे अधिक उम्र के भी पुरुष एवं महिलाएं चुनाव मैैदान में, लेकिन हर गांव में वहां के बैनर पोस्टर के साथ ही प्रत्याशियों का आकलन करने पर अधिक चेहरे युवा ही हैं इन प्रत्याशियों में गांव की सरकार बनाने का उत्साह भी दिख रहा है।
वह परंपरागत ढंग से ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधि की बजाए परिवर्तन भी चाहते हैं। लेकिन उनका कहना है कि गांव की जनता ने अगर युवा शक्ति को अपना समर्थन दिया तो वह जरूर बदलाव की प्रक्रिया शुरू करेंगे।
बड़रांव, ब्लाक से चुनाव लड़ रहे युवा प्रत्याशी धीरज शर्मा का कहना है कि चुनाव में अधिक धनबल का प्रयोग होने से मतदाता से लेकर एक सोच लेकर मैदान में चुनाव लड़ रहे प्रत्याशिययों के सामने संकट की स्थिति है कि ऐसे में वह क्या करें लेकिन फिर भी वह पूरे सिद्दत के साथ मैदान में जुटे हैं।
अमिला ग्राम पंचायत के मतदाता छोटू पाण्डेय, अरूण, अनिल कुमार, दिनेश आदि ने बताया युवाओं के पंचायत चुनाव में आने से एक परिवर्तन की उम्मीद उनके माध्यम से दिखाई दे रही है। युवाओं के हाथ में कमान होने से वह गांव के विकास के बारे में बेहतर सोच सकते हैं। कहा कि पंचायत चुनाव में पढ़े लिखे एवं सुलझे हुए युवाओं के प्रधान बनने से पुरानी ढर्रे पर चली आ रही व्यवस्था में सुधार होगा।