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एसटीपी के लिए जमीन तलाशने का काम तेज

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नगर के तमसा नदी में गिरता नाला।संवाद - फोटो : MAU
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मऊ। तमसा नदी को प्रदूषण से मुक्त कराने के लिए नगर पालिका प्रशासन एड़ी चोटी एक किए हुए है। लेकिन अभी तक उसे एसटीपी निर्माण के लिए जमीन नहीं मिल सकी है। हालांकि इसके लिए तीन सदस्यीय टीम का गठन भी किया गया है। फिलहाल, टीम ने जमीन तलाशने का काम जोरशोर से शुरू कर दिया है। वहीं, पालिका खुद की जमीन पर भी ध्यान केंद्रित किए है। यदि सरकारी ही जमीन मिलती है तो एसटीपी का निर्माण कार्य जल्द शुरू कराया जाएगा। तमसा नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए नगरपालिका प्रशासन ने एसटीपी निर्माण के लिए जमीन तलाशने की प्रक्रिया तेज कर दी है। अभी नगरपालिका प्रशासन तमसा नदी में गिर रहे दूषित पानी का ट्रीटमेंट अस्थायी रुप से बायो रेमिडेशन पद्धति से करा रहा है। पालिका क्षेत्र के 42 वार्डो से निकलने वाले 17 नालों से रोजाना हजारों गैलन लीटर गंदा पानी नदी में गिर रहा है। इस पानी को अस्थायी रुप से बायो रेमिडेशन पद्धति से साफ किया जा रहा है। जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि ऐसे में नदी के पानी की क्वालिटी में सुधार हो रहा है। लेकिन पूरी तरह से नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) का निर्माण जरूरी है। ऐसे में पांच एकड़ जमीन नगर क्षेत्र के आसपास एरिया में तलाीश जा रही है। हालांकि अभी तक टीम को जमीन नहीं मिल सकी है। पालिका सूत्रों की माने तो जमीन तलाशने के साथ ही पालिका अपनी जमीन पर भी नजर रखे है। यदि कहीं सरकारी जमीन निगाह में आती है तो उस पर विचार किया जाएगा। टीम को भी हिदायत दी गई है कि वह जमीन की तलाश के दौरान सरकारी जमीन पर भी निगाह रखे। अधिकारियों की मानें तो एसटीपी बनने से ना केवल तमसा नदी निर्मल होगी, बल्कि इससे गिरते भूगर्भ जलस्तर में स्थिरता आने के साथ व्यर्थ बहने वाले गंदे पानी का सदुपयोग भी हो सकेगा। नगरपालिका अधिशासी अधिकारी दिनेश कुमार ने बताया कि एसटीपी के लिए जमीन तलाशने का तेज कर दिया गया है। तीन सदस्यीय टीम भी इसके लिए प्रयास कर रही है। पालिका की निगाह सरकारी जमीन पर भी है। यदि मिलेगी तो एसटीपी के लिए इसका भी प्रयोग किया जाएगा।

नगर में बहती तमसा नदी।संवाद- फोटो : MAU

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