सरयू नदी में बढ़ रहे जलस्तर को लेकर प्रशासन और सिंचाई विभाग अलर्ट हो गया है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों और जलस्तर पर नजर रखने के लिए 30 बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर दिया गया है।
इसमें दोहरीघाट के गौरीशंकर घाट और मधुबन के हाहानाला पर स्थापित बाढ़ चौकियों से जलस्तर पर पल-पल की नजर रखी जा रही है। वहीं, गांवों में बाढ़ का पानी घुसने पर ग्रामीणों के लिए 16 शरणालय बनाए गए हैं।
सिंचाई विभाग के कार्यालय पर 24 घंटे काम करने के लिए कंट्रोल रूम स्थापित कर दिया गया है। जनपद के मधुबन और घोसी तहसील क्षेत्र में सरयू नदी कहर बरपाती है। दोहरीघाट कस्बे के कई मोहल्ले सरयू की बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं।
गौरीशंकर घाट और मुक्तिधाम पर नदी कटान भी करती है। घोसी तहसील और मधुबन तहसील के कुल 51 गांव बाढ़ की चपेट में रहते हैं। यही नहीं, इन गांवों की न सिर्फ फसल बर्बाद होती है, बल्कि दोहरीघाट कस्बे के मोहल्लों में पानी घुसने से लोगों का निकलना मुश्किल हो जाता है।
दोनों तहसीलों में कुल 30 बाढ़ चौकियां बनाई गई हैं। सभी गेजों, रेगुलेटरों की ऑयलिंग, ग्रीसिंग और मरम्मत का कार्य कराया जा रहा है।
गौरीशंकर घाट और हाहानाला पर स्थापित स्थायी बाढ़ चौकियों से जलस्तर पर नजर रखी जा रही है। इसके साथ ही गांवों में बाढ़ का पानी घुसने पर ग्रामीणों को सुरक्षित बाहर निकालकर उनके रहने के लिए 16 शरणालय बनाए गए हैं।
जन-धन हानि रोकने के लिए 200 आपदा मित्रों को तैनात किया जाएगा। इनमें 100 प्रशिक्षित आपदा मित्र और 100 होमगार्ड जवान शामिल हैं। सिंचाई और स्वास्थ्य विभाग को भी निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।
साथ ही जिला प्रशासन ने वालंटियर की तैनाती के अलावा सेवा भाव से जुड़ने वाले आपदा मित्रों से इससे जुड़ने की अपील की है।
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बाढ़ मद में 1.23 करोड़ एवं आपदा मद में 74 लाख स्वीकृत
मऊ। बाढ़ एवं आपदा से निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह कमर कसकर तैयार है। शासन की तरफ से 1.97 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इसमें बाढ़ मद में 1.23 करोड़ और आपदा मद में 74 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत है। बाढ़ से सबसे ज्यादा मधुबन तहसील के गांव प्रभावित होते हैं। यही नहीं, सरयू की बाढ़ से जन-धन की काफी हानि होती है। पिछले वर्ष आपदा से 26 लोगों की मौत हुई थी। इसमें सर्पदंश से छह, डूबने से 17 एवं वज्रपात से तीन लोगों की मौत हुई थी। इन्हें सरकार की तरफ से चार-चार लाख रुपये की दर से एक करोड़ चार लाख रुपये दिए गए थे। वहीं, इस वर्ष अब तक आपदा से नौ लोगों की मौत हुई है। इसमें सर्पदंश से दो, बिजली गिरने से एक, डूबने से पांच लोगों की मौत हुई थी। इसके साथ ही एक की मौत नीलगाय के मारने से हुई थी। संवाद
कोट-
सरयू की बाढ़ से निपटने के लिए विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर रणनीति बना ली गई है। 200 आपदा मित्र तैयार कर लिए गए हैं। साथ ही संबंधित एसडीएम को निगरानी करने का निर्देश दिया गया है। सिंचाई विभाग एवं स्वास्थ्य विभाग को भी अलर्ट किया गया है। वहीं, 30 बाढ़ चौकियां और 16 शरणालय भी बनाए गए हैं।
-आनंद वर्धन, जिलाधिकारी