मऊ। शहर में कई स्थानों पर भारी जाम लगता है। इन स्थानों पर लगने वाला जाम गंभीर घायलों अथवा बीमारों के लिए जानलेवा भी हो सकता है। इस भारी जाम की वजह से किसी की जान न चली जाए इसकी व्यवस्था प्रशासनिक अधिकारियों को करनी चाहिए। सबसे ज्यादा जाम गाजीपुर तिराहा से रोडवेज और फाटक बंद होने पर बाल निकेतन पर लगता है।
सड़कों पर रोजाना वाहनों की संख्या बढ़ती जा रही है। एक अनुुमान के मुताबित जनपद में प्रतिदिन लगभग दो सौ वाहनों की संख्या बढ़ रही है। जनपद में नई सड़कों की संख्या लगभग नगण्य है।यही वजह है कि सड़कों पर वाहनों का भार प्रतिदिन बढ़ रहा है। सुबह और दोपहर में खासकर स्कूलों की छुट्टी होने के समय वाहनों की लंबी कतार गाजीपुर तिराहे से लेकर रोडवेज तक लग जाती है।
जाम से निकलने के लिए लोगों को काफी समय लग जाता है। इस जाम में यदि किसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त रोगी अथवा किसी दुर्घटना में घायल गंभीर व्यक्ति को अस्पताल पहुंचने में देरी होती है। जाम की वजह से एंबुलेंस को निकलने का कोई रास्ता नहीं बचता है। इन परिस्थितियों में मरीज की परिजनों की सांस अटकी रहती है।
रोजाना लगने वाले ये जाम ऐसे मरीजों अथवा गंभीर घायलों के लिए जान लेवा साबित हो सकते हैं जैसा कि सोनभद्र में जाम में फंसी एक महिला की मरीज की अस्पताल पहुंचने सेपहले ही मौत हो गई। इस बारे में काझा निवासी रतिलाल का कहना है कि प्रशासन को कोई वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए।
पटरी से जाम हटाना प्रशासन की जिम्मेदारी
बुनकर कॉलोनी निवासी आरिफ का कहना है कि जाम से निजात के उपाय किए जाने चाहिए। सहादतपुरा निवासी राजकुमार का कहना है कि जिन स्थानों पर जाम ज्यादा लगता है उन स्थानों पर सड़क की पटरियों को खाली कराया प्रशासन की जिम्मेदारी है। सहादतपुरा चर्च कंपाउंड निवासी राजू का कहना है कि लाख कवायद के बावजूद प्रशासन जाम लगने वाले स्थानों पर सड़क की पटरियों को खाली नहीं करा पाता है। यह गंभीर बात है।