दोहरीघाट। तीन दिन घटने के बाद शुक्रवार को अचानक घाघरा के जलस्तर में दस सेेमी की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। घाघरा के जलस्तर में दस सेमी बढोत्तरी की जानकारी होने पर लोगों में एक बार फिर से दहशत व्याप्त हो गया। जलस्तर बढ़ने के बाद जब पानी कम होता है, उस दौरान कटान तेजी से होता है।
घाघरा के एक बार पुन: बढ़ने से लोगों में दहशत व्याप्त है। शुक्रवार को घाघरा के जलस्तर में 24 घंटे के अंदर 10 सेमी बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। दोहरीघाट नगर क्षेत्र के ऐतिहासिक धरोहरों पर घाघरा के कटान का खतरा मंडराने लगा है। साथ ही साथ नगर का अस्तित्व खतरें में पड़ गया है। नदी की तेज लहरें भारत माता मंदिर के साथ साथ शवदाह घाट पर जोरदार टक्कर मार रही हैं। इसके चलते मुक्तिधाम पर स्थित विषम हो गई है। ये दोनों स्थान कटान के मुहाने पर हैं। नदी के उफनाने के कारण दोहरीघाट नगर क्षेत्र के मलाह टोला, भगवानपुर और दलित बस्ती में एक बार पुन: पानी के प्रवेश करने की संभावना बढ़ गई हैं। अनहोनी के आशंका से भयभीत लोगों में बेचैनी भय व्याप्त है।
नगर प्रशासन की उदासीनता के चलते एकत्र गंदगी नदी के पानी के साथ बहकर मुहल्लों में घुस जा रहा है। नगर पंचायत की उदासीनता से लोगों में काफी नाराजगी है। वर्तमान समय में नगर क्षेत्र की एतिहासिक धरोहरे, मुक्तिधाम, खाकी बाबा की कुटी, दुर्गा मंदिर, डाक बंगला, डीह बाबा का मंदिर, शाही मस्जिद और हनुमान मंदिर पर कटान का खतरा बढ़ गया है। घाघरा के तटवर्ती इलाकों में अभी भी फसले पानी में डुबी थी। एक बार फिर से नदी के बढ़ने पर फसलों के डूबने का खतरा मंडराने लगा हैं। पानी कम होने पर किसान खुश थे कि फसल बच जाएगी। लेकिन फिर से नदी का जलस्तर बढ़ने से फसलों के बर्बाद हो जाने की संभावना बढ़ गई है। दूसरी तरफ नवली चिउटीडाड़, रिंग बांधा के साथ बीबीपुर, बेलौली बंधे पर पुन: पानी का दबाव बढ़ गया है। इससे बंधों पर खतरा मंडराने लगा है। गौरी शंकर घाट पर शुक्रवार को घाघरा का जल स्तर 70.40 मीटर रिकार्ड किया गया। जबकि गुरुवार को यहां पर जलस्तर 70.30 मीटर था। इस तरह से 24 घंटे के भीतर घाघरा का जल स्तर 10 सेमी बढा है। जबकि खतरे का निशान 69.90 पर है।