मऊ। प्रदेश सरकार की स्थानांतरण नीति के दिशा निर्देशों की अनदेखी मुख्य चिकित्सा अधिकारी को महंगी पड़ गई। डाक्टरों और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती सहित अन्य रिपोर्ट स्वास्थ्य महानिदेशक को भेज दी गई। इसके चलते जिन डाक्टरों का तबादला नहीं होना चाहिए था, उनका भी स्थानांतरण गैर जनपद हो गया। उच्च स्तर पर शिकायत की जांच में गड़बड़ी सामने आने पर जिले के चार डाक्टरों का किया गया तबादला शासन के निर्देश पर निरस्त करना पड़ा। महानिदेशक ने सीएमओ को नोटिस जारी जवाब मांगा है। ऐसे में गलत रिपोर्ट तैयार करने वाले लिपिकों पर कार्रवाई की तलवार लटकी हुुई है। तबादला नीति के तहत महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं की तरफ फरवरी में ही जिले में तैनात डाक्टरों और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती सहित अन्य विवरण मांगे गए थे। तत्कालीन सीएमओ की ओर से महानिदेशालय को सूचना प्रेषित कर दी गई। इस सूचना में ऐसे डाक्टरों और कर्मचारियों के तथ्यों को नजरअंदाज करते हुए विवरण भेज दिए गए, जिन्हें स्थानांतरण पालिसी के तहत तबादले से छूट प्राप्त है। सीएमओ की इसी सूचना के आधार पर जिले के चार डाक्टरों डा. अशोक कुमार और डा. संतोष कुमार यादव,डा.संगीता और डा.राजेश कुमार गौतम का जनपद से तबादला कर दिया गया। इनमें से डा. अशोक कुमार का गोरखपुर, डा. संतोष कुमार यादव का देवरिया, डा. संगीता का गाजीपुर और डा. राजेश कुमार गौतम का चंदौली स्थानांतरण कर दिया गया। इनमें डा. अशोक कुमार लेवल 3 तथा शेष तीन अन्य चिकित्सक लेबल 2 के अधिकारी हैं। इनमें से डा. संतोष कुमार यादव और डा. अशोक कुमार दिव्यांग की श्रेणी में हैं। इसके अलावा गंभीर बीमारी से जूझ रहे कुष्ठ चिकित्सा के एक कर्मचारी का तबादला कर दिया गया। मामला तूल पकड़ने पर हुई जांच में गड़बड़ी सामने आने पर विभाग की किरकिरी होने पर शासन के निर्देश पर इन चारों डाक्टरों का स्थानांतरण निरस्त करना पड़ा। मामले में महानिदेशक डा. लिली सिंह के निर्देश पर निदेशक (प्रशासन) डा. राजा गणपति आर की ओर से सीएमओ को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। उधर सीएमओ मऊ की ओर से हुई इस गड़बड़ी की रिपोर्ट महानिदशेक की ओर से शासन को भेज दी गई है। बता देंकि तत्कालीन सीएमओ डा. एसएन दूबे 31 जुलाई को सेवानिवृत्त हो गए हैं।
प्रभारी सीएमओ डॉ. जीसी पाठक ने बताया कि जो भी रिपोर्ट महानिदेशालय को भेजी गई थी, वह तत्कालीन सीएमओ डा. एसएन दूबे की ओर से भेजी गई थी। वे 31 जुलाई को सेवानिवृत्त हो गए। नोटिस के जवाब में उच्चाधिकारियों के दिशा निर्देश पर आगे की प्रकिया अपनाई जाएगी।