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पोर्टल की धीमी गति ने हजारों आयुष्मान धारकों को उलझाया

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मऊ। पात्रता होने के बाद भी आयुष्मान मरीजों का इसका लाभ नहीं मिल रहा है, इसकी वजह बन रही है उनके पास कार्ड का न होना। दरअसल पोर्टल सही से नहीं चलने से हजारों कार्ड फंस गए हैं। ऐसे में ये सभी लाभार्थी पात्र होने के बाद भी फिलहाल तो लाभ से वंचित हैं। वहीं 30 हजार से अधिक लाभार्थी जो आयुष्मान योजना के तहत गोल्डेन कार्ड भी पा चुके है, उनका कार्ड निरस्त कर नए सिरे से बनाए जाने की कवायद की जा रही है। इसके पीछे वजह है कि सूची के साथ कार्ड बनवाने के लिए दिए गए कागजात से परिवार के सभी सदस्यों का पूरा विवरण नहीं एक समान नहीं होना है। सकारात्मक बात है कि यह सभी पात्र लाभार्थी अपने दस्तावेज को ठीक करा कर दोबारा कार्ड बनवा सकते हैं। लेकिन विभागीय लापरवाही के चलते लाभार्थियों को दोहरी परेशानी से जूझना पड़ेगा।
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जिले में दो लाख 29 हजार परिवार बीपीएल और 56 से अधिक हजार परिवार अंत्योदय कार्ड धारक है। 2011 जनगणना के अनुसार 93075 गरीब परिवारों को चिह्नित कर पहले चरण में उन्हें आयुष्मान योजना में शामिल किया गया था। इसके बाद दूसरे चरण में वंचित गरीब परिवारों प्रदेश सरकार की तरफ से सर्वे कराया गया। इसके तहत जिले में 12162 लाभार्थी गरीब परिवार पात्र पाए गए। वहीं जिले के सभी अंत्योदय कार्ड धारकों को आयुष्मान योजना में शामिल कर उनका गोल्डेन कार्ड बनाया जा रहा है। वहीं वर्तमान में दो हजार से अधिक नए लाभार्थियों का कार्ड पोर्टल की धीमी गति से कार्य करने के चलते नहीं बन पा रहा है। लेकिन इस बीच सबसे बड़ी समस्या उन कार्ड धारकों की है, जिनका कार्ड निरस्त कर नए सिरे से बनाया जाना है। ऐसे लाभार्थियों की संख्या करीब 32 हजार से अधिक है। विभागीय अधिकारी इसके पीछे वजह बताते है कि आयुष्मान कार्ड सबसे पहले वर्ष 2011 का आर्थिक जनगणना के आधार पर गरीबों का बनाया गया था। विभाग के आंकड़ों के अनुसार जनपद में ऐसे लोगों की संख्या करीब 93 हजार थी। इसके बाद भी अनेक लाभार्थी कार्ड से वंचित रह गए थे। ऐसे लोगों को सीएम का पत्र मिला, इन लोगों की कुल संख्या 10952 थी। अब शासन के आदेश पर उज्जवला योजना, अंत्योदय कार्ड धारक और श्रमिक कार्ड वालों का भी आयुष्मान कार्ड बनाया जा रहा है। ऐसे में समस्या यह आ रही है कि किसी लाभार्थी ने आर्थिक जनगणना के आधार पर कार्ड बनाने के लिए फार्म भरा, उसमें परिवार के कुल पांच लोगों का नाम है। उसी दौरान सीएम का पत्र भी आया, जिसमें सात लोगों के नाम थे। अब ऐसे परिवारों का डाटा सही से नहीं मिलने पर पोर्टल पर परिवार के सभी सदस्यों का पूरा विवरण भरने के बाद डाटा डुप्लीकेट बताकर रद्द कर दे रहा है।
सिर्फ 13 केंद्र पर बन रहा है आधार
मऊ। आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए कामन सर्विस सेंटर, जनसेवा केंद्र यूटीआईआईपीएसएल (आधार व पैन बनाने वालों) को अधिकृत किया गया है। जिले में ऐसे कुल करीब 13 सौ केंद्र हैं लेकिन सिर्फ 13 केंद्र ही आयुष्मान कार्ड बनाने का काम कर रहे हैं। अब शासन के नए आदेश में पंचायत सहायकों को भी गांव में आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए अधिकृत किया गया है।
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