आस्था का केंद्र है दोहरीघाट मुक्तिधाम रोड स्थित प्राचीन शिव मंदिर।संवाद
दोहरीघाट। सावन के पहले सोमवार को स्थानीय कस्बे के मुक्तिधाम रोड स्थित प्राचीन शिव मंदिर में श्रद्धालु विधि-विधान के साथ भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे। मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ को देखते हुए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
सावन माह में पूरे महीने यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। स्थानीय लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र बने इस प्राचीन शिव मंदिर में वर्षभर पूजा-अर्चना होती है, लेकिन सावन के दौरान इसकी धार्मिक महत्ता और बढ़ जाती है।
दूर-दराज से श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। मान्यता है कि सीता स्वयंवर के बाद भगवान श्रीराम, माता सीता के साथ अयोध्या लौट रहे थे। इसी स्थान पर सरयू नदी के तट पर भगवान श्रीराम और भगवान परशुराम का मिलन हुआ था।
दोनों महापुरुषों के मिलन की स्मृति में इस स्थान का नाम ‘’दोहरीघाट’’ पड़ा। कहा जाता है कि भगवान परशुराम के आग्रह पर श्रीराम ने यहां शिवलिंग की स्थापना की थी। बाद में इसी स्थान पर मंदिर का निर्माण कराया गया, जो आज प्राचीन शिव मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है।
1991-92 की बाढ़ के बाद हुई पुनर्स्थापना-वर्ष 1991-92 की भीषण बाढ़ के दौरान कटान से यह मंदिर क्षतिग्रस्त होकर गिरने लगा था, जिससे कस्बे में चिंता का माहौल बन गया था। तत्कालीन डीएम के सहयोग और स्थानीय लोगों के प्रयास से शिवलिंग को सुरक्षित स्थान पर स्थापित किया गया। इसके बाद वर्तमान मंदिर का निर्माण कराया गया। तभी से यह मंदिर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है।