ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद एक जुलाई से शिक्षा सत्र अव्यवस्थाओं के बीच शुरू होगा। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से एक माह तक चली तैयारी आधी अधूरी ही नजर आ रही है। अधिकांश परिषदीय विद्यालयों में बुनियादी सुविधाएं बहाल नहीं हो सकी हैं। अधिकांश विद्यालयों में हैंडपंप प्रदूषित पानी उगल रहे हैं। यही नहीं बने शौचालयों की साफ सफाई की व्यवस्था न होने से अधिकांश बेकार पड़े हैं। हालत यह है कि अभी तक बच्चों पुस्तकें भी नहीं आयी हैं।
जिले में 1060 प्राथमिक तथा 442 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। गर्मी की छुट्टी के बाद एक जुलाई से शिक्षा सत्र शुरू हो रहा है। आरटीई के तहत विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं बिजली, पेयजल आदि सुविधाओं को बहाल किया जाना है। अधिकांश परिषदीय विद्यालयों मेें शौचालय निष्प्रयोज्य पड़े हैं। शौचालयों की सफाई तथा पानी की समुचित व्यवस्था न होने से ताला ही लटका रहता है। ऐसे में बालिकाओं को बाहर जाना पड़ता है। इसी तरह पेयजल की भी स्थिति ठीक नहीं है। प्रत्येक ब्लाक में दर्जनों विद्यालयों में इंडिया मार्क टू हैंडपंप खराब पड़े हैं। अधिकांश विद्यालयों में हैंडपंप खराब पड़े हैं या प्रदूषित पानी उगल रहे हैं।
अप्रैल माह में विभाग की ओर से 150 हैंडपंपों को रिबोर कराने की सूची जल निगम को भेजकर इतिश्री कर लिया। विभाग की ओर से शौचालय के लिए पंचायती विभाग, हैंडपंपों के लिए जल निगम आदि विभागों को पत्र जारी कर इतिश्री कर लिया। प्रत्येक स्कूलों में महकमे की ओर से मेंटीनेंस के नाम पर पांच हजार से आठ हजार रुपये भी दिया जाता है। लेकिन सब कागज में ही खर्च कर दिया जाता है। इस बारे में मंडलीय सहायक निदेशक डॉ. विजय प्रताप सिंह का कहना है कि समस्त विद्यालयों में बिजली, पेयजल, शौचालय सहित विभिन्न सुविधाओं को बहाल करने के लिए बीएसए को निर्देेश दिया गया है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से रिपोर्ट मांगी गई है। जिले के उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 100 से अधिक छात्र संख्या हैं। वहां कंप्यूटर की सुविधा प्रदान की गई है। अधिकांश विद्यालयों पर बिजली की सुविधा व सुरक्षा न होने से कंप्यूटर शो पीस बनकर रह गए हैं।