मधुबन थाना क्षेत्र के दुबारी मोड़ पर स्थित डाक्टर उमेश चंद्र
गुप्ता के घर में बदमाश दीपक की हत्या नहीं हुई थी, बल्कि साथी बदमाश
रामप्रताप सिंह ने गोली मारकर की थी।
इसके बाद दीपक के शव को डाक्टर के घर
के सामने फेंक कर भाग गए थे। यह खुलासा सीओ वंशीधर मिश्रा ने दो बदमाशों को
पकड़ने के बाद शनिवार को की। पुलिस की मानें तो पैसे के लेन देन को लेकर
दरगाह में तीनों के बीच विवाद हुआ था इसके बाद रामप्रताप ने दीपक को गोली
मार दी थी।
पुलिस ने हत्या में शामिल दोनों बदमाशों को फतहपुर ताल रतोय
स्थित पुलिया के पास हल्की मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया है।
शनिवार को इस मामले का खुलासा करते हुए सीओ वंशीधर मिश्रा ने बताया कि डा.
उमेश चंद गुप्ता की तहरीर पर पुलिस हत्या के कारणों का पता लगाने में जुटी
थी।
दीपक राय के पास से मिली मोबाइल व सर्विलांस के जरिए पुलिस ने अनिल
कुमार थाना रसड़ा ग्राम मांदा जिला बलिया व कोपागंज थाना क्षेत्र के लारपुर
गांव निवासी रामप्रताप सिंह को शुक्रवार को उस समय गिरफ़्तार कर लिया जब
दोनों फतहपुर की तरफ से आ रहे थे।
श्री मिश्र ने बताया कि पुलिस ने जब
घेराबंदी करके उक्त दोनों को पकड़ना चाहा तो दोनों ने पुलिस टीम पर फायरिंग
कर दी। हालांकि किसी तरह पुलिस ने दोनों को धर दबोचा।
तलाशी लेने पर
दोनों के पास से 315 बोर के दो अदद कट्टा व दो जिंदा कारतूस बरामद हुए।
पूछताछ में रामप्रताप सिंह व अनिल ने बताया कि 25 नवंबर को पैसे के लेन देन
को लेकर हम लोगों के बीच विवाद हुआ। कहासुनी बढ़ने पर रामप्रताप सिंह ने
दीपक पर गोली चला दी। जिससे वह मौके पर गिरकर छटपटाने लगा।
आनन फानन
में रामप्रताप व अनिल दीपक को लेकर मधुबन के दुबारी मोड़ पर स्थित डाक्टर
उमेश चंद गुप्ता के क्लिनिक पर पहुंचे और मरा हुआ समझकर वहीं छोड़कर भाग
गए। हड़बड़ी में अनिल की मोबाइल दीपक के पास छूट गई। पुलिस ने राम प्रताप
सिंह व अनिल को हत्या, हत्या का
प्रयास और 25 आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा
पंजीकृत कर जेल भेज दिया। गौरतलब है कि घटना के बाद से ही कई प्रकार के
कयास लगाए जा रहे थे। डाक्टर से लेकर पुलिस की भूमिका संदिग्ध लग रही थी।