समाजवादी पेंशन के लाभार्थियों के चयन में धांधली का मामला उजागर हुआ है। गाइड लाइन की अनदेखी करते हुए अपात्रों को पेंशन के लिए पात्र बना दिया गया।
परदहा ब्लाक के रैनी गांव में जांच के दौरान समाज कल्याण अधिकारी के सामने कोताही उजागर हुई। गांव के मोटरसाइकल और कोठी वालों को भी समाजवादी पेंशन का लाभ मिला है। मामले में ग्राम पंचायत अधिकारी और ग्राम प्रधान की संलिप्तता उजागर हुई।
रैनी गंाव की दलित बस्ती की दर्जनों महिलाओं ने शुक्रवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर गांव में भारी संख्या में अपात्रों को समाजवादी पेंशन के लिए पात्र माने जाने की शिकायत की। इसपर डीएम चंद्रकांत पांडेय ने जिला समाज कल्याण अधिकारी को तत्काल गांव में जाकर प्रकरण की जांच करने का निर्देश दिया।
जिला समाज कल्याण अधिकारी विजय प्रताप यादव ने शनिवार को पहुंचकर ग्रामीणों की चौपाल लगाई और पूरे गांव वालों के सामने समाजवादी पेंशन धारकों की जांच पड़ताल की। जांच में गांव के कुल लक्ष्य 79 के सापेक्ष 14 लाभार्थी अपात्र पाए गए।
इन 14 परिवारों के पास मोटरसाइकिलें और पक्के मकान भी हैं। जांच पूरी करने के बाद उसी दिन देर शाम को जिला समाज कल्याण अधिकारी ने अपनी रिपोर्र्ट जिलाधिकारी को सौंप दी। जांच रिपोर्ट में इस भारी गड़बड़ी के लिए ग्राम पंचायत अधिकारी बृजराज साहनी, सहायक विकास अधिकारी समाज कल्याण सोएब खां को जिम्मेदार बताया गया है। जांच के दौरान उपस्थित ग्राम प्रधान के पति जंगबहादुर ने बताया कि जो सूची पेंशनधारकों की है उसे सेक्रेटरी ने सारी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे दिया था। इतना ही ग्राम प्रधान को भी इस धांधली के लिए दोषी माना गया है। इस संबंध में शनिवार को भी समाज कल्याण विभाग के सहायक विकास अधिकारी समाज कल्याण सोएब खां ने भी गंाव में पहुंचकर जांच की और एक दिन पूर्व ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों को सही पाया।