यहां भी अस्पताल बन सकते हैं लाक्षागृह
जिले के किसी भी निजी अस्पताल में भुवनेश्वर के एसयूएम हास्पिटल जैसी घटना कभी भी हो सकती है। जहां आईसीयू में लगी आग से 23 लोगों की मौत हो गई। घटना के बाद अमर उजाला ने तहकीकात की तो चौंकानेवाली जानकारी सामने आई। जिले के किसी निजी अस्पताल में फायर फाइटिंग की व्यवस्था मानक के अनुसार नहीं है। अधिकांश अस्पतालों में इसकी व्यवस्था ही नदारत है जबकि कुछ एक स्थानों पर कोरम पूरा किया गया है। जहां थोड़ी व्यवस्था है भी तो संसाधन पुरातन हैं। फायर विभाग ने इस संबंध में 15 अस्पतालों को नोटिस जारी किया है।
जिले में 33 निजी अस्पताल पंजीकृत हैं। इसके अलावा मुख्य चिकित्सा धिकारी के कार्यालय में 48 एलोपैथिक ओपीडी, 75 आयुर्वेदिक क्लीनिक, 28 होम्योपैथ की तथा 116 यूनानी क्लीनिक का रजिस्ट्रेशन किया गया है। अस्पताल हो या फिर क्लीनिक रजिस्ट्रेशन के लिए फायर, प्रदूषण और बायोगैस मैनेजमेंट सिस्टम लगवाना अनिवार्य होता है। लेकिन एक दो को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश अस्पतालों में मात्र कोरम को पूरा किया है।
हाल ही में कोलकाता के एक अस्पताल में हुई अगलगी की घटना के बाद जारी हुए शासनादेश के क्रम में फायर विभाग ने जब इन रजिस्टर्ड अस्पतालों की सुधि ली तो पूरा गोलमाल सामने आ गया। जिला अस्पताल सहित अधिकांश अस्पतालों में फायर फायटिंग की व्यवस्था नहीं मिली। इस पर अग्निशमन अधिकारी लक्ष्मण यादव ने जिला अस्पताल सहित 15 अस्पतालों को नोटिस जारी किया है। इस बारे में मुख्य चिकित्साधिकारी डा. एके पांडेय का कहना है कि जो भी नियमावली में होगा उसका पालन पूरा कराया जाएगा।