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मधुबन में पहली बार खिला कमल

Sat, 11 Mar 2017 11:56 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/मऊ
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भाजपा प्रत्याशी दारा सिंह चौहान को प्रमाण पत्र प्रदान करते आरओ विमल दूबे।
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भाजपा के प्रत्याशी दारा सिंह चौहान ने बड़ी जीत दर्ज कर सपा बसपा,  कांग्रेस और सोसलिस्ट के गढ़ में सेंध लगा दी।अब तक इस सीट पर इन्ही  पार्टियों का कब्जा रहा है।यह सीट पहले 2007से  बसपा के  पास थी।दारा सिंह ने यह सीट बसपा विधायक उमेश चंद पांडेय से छीनी है।
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नत्थूपुर पर ज्यादातर सोसलिस्ट और कांग्रेस का ही कब्जा रहा।चार बार  सोसलिस्ट पार्टी तो पांच बार कांग्रेस इस सीट से विजई रही है। उसके बाद चार बार बसपा तो एक बार सपा का भी कब्जा रहा।भाजपा या उसके  गठबंधन के प्रत्याशी हमेशा हाशिये पर रहे।लोकसभा के चुनाव में भाकपा के कई  दिग्गज नेता सांसद रहे लेकिन विधान सभा में उन्हें जीत का सेहरा नहीं बंधा। आजाद भारत में प्रथम विधान सभा का गठन 20 मई 1952 को हुआ था।

पहली बार सन  1952 के सम्पन्न विधान सभा चुनाव में क्षेत्र के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी  पंडित रामसुन्दर पांडेय को सोसलिस्ट पार्टी से चुनाव जीतकर विधान सभा में  जाने का गौरव मिला।वे 1952 से लेकर 1962 तक लगातार विधायक  रहे।इसके  बाद 1967 में यह सीट सुरक्षित हो गईं।इस चुनाव में सोसलिस्ट पार्टी के  मंगलदेव विशारद ने कांग्रेस के विश्वनाथ को हराकर जीत दर्ज की थी।इसके बाद 1969 के चुनाव में  सोसलिस्ट पार्टी के मंगलदेव विशारद को हराकर कांग्रेस के लालसा राम ने पहली  बार जीत दर्ज कर कांग्रेस का खाता खोला।
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इसके बाद कांग्रेस के जगदीश मिश्र  लगातार दो बार विधायक रहे। जगदीश मिश्र 1974 में कांग्रेस और 1977 के उप  चुनाव में जनता दल से चुनाव जीता था। 1980 में जनता पार्टी के खात्मे के बाद राजकुमार राय ने कांग्रेस से जीत दर्ज की।वर्ष 1985 के चुनाव में  विष्णुदेव गुप्ता विधान सभा पहुंचे।1989 और 1991 में  इस सीट पर कांग्रेस के टिकट पर अमरेश चन्द पांडेय ने दो बार जीत दर्ज  की।इसी के बाद इस सीट पर क्षेत्रीय पार्टियों का दबदबा बढ़ गया।
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