पौराणिक नदी तमसा को स्वच्छ बनाने के लिए चलाया जा रहा निर्मल तमसा अभियान मजबूती पकड़ रहा है। शुक्रवार को गायघाट पुल पर एआरटीओ, डूडा विभाग और अन्य शहरी ने श्रमदान किया। नदी के बीच में पुराने पुल के मलबे को तोड़ा जाना जारी रहा। डीएम ने यहां पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया।
कम पानी और गंदगी की वजह से तमसा नदी के प्रवाह को गायघाट के पास अंग्रेजों के जमाने में बने टूटे पुल के मलबे ने रोक रखा है। इस मलबे को हटाने के उद्देश्य से डीएम वैभव श्रीवास्तव ने इसका जिम्मा एआरटीओ और डूडा विभाग को दिया है। निर्मल तमसा अभियान शुरू होने के पहले दिन से ही लोगों ने सफाई अभियान के साथ साथ टूटे पुल के मलबे को हटाने की योजना बनाई।
जिसके बाद गुरुवार को जेसीबी मशीन ने टूटे पुल को कुछ मलबा वहां से हटाया। इसी प्रकार से शुक्रवार को भी दो जेसीबी मशीनों ने सफाई करने वाली टीम की देखरेख में नदी के प्रवाह को रोकने वाले मलबे को नदी से निकाला। सुबह करीब सात बजे जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने गायघाट पहुंचकर सफाई अभियान का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने गायघाट पर श्रमदान करने वाले लोगों और एआरटीओ व डूडा विभाग के कर्मचारियों को बधाई दी।
साथ ही कहा कि उनके प्रयास से निर्मल तमसा अभियान का धीरे धीरे असर दिखने लगा है। इसी प्रकार उन्होंने ढेकुलियाघाट, हनुमान घाट, बमघाट, बेलवाघाट आदि स्थानों पर सफाई कर रहे से बात भी की। हनुमान घाट से बमघाट के बीच शुक्रवार को भी तमसा नदी की खोदाई जेसीबी द्वारा की गई। नदी को एक तरफ से बहने से रोकने और नई धारा देने के लिए खुदाई का कार्य हो रहा है। जिसमें जिले के कई ठेकेदारों ने अपनी अपनी जेसीबी मशीन नि:शुल्क निर्मल तमसा अभियान के लिए दी है।