नगर के रोडवेज पर वनवे होने के बावजूद धडल्ले से जाने बड़े वाहन।संवाद
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मऊ। नगर को जाम से निजात नहीं मिल पा रही है। कारण रूट डायवर्जन और वन वे का सही तरीके से पालन नहीं कराया जाना है। ऐसे में बाल निकेतन से सदर चौक और औरंगाबाद तक जाम लगना आम बात हो गई है। रोजाना लोग इस जाम में फंस कर प्रशासन को कोस रहे हैं। लेकिन जिम्मेदार इससे पूरी तरह लापरवाह हैं। शहर का सबसे व्यस्त इलाका बाल निकेतन से मिर्जाहादीपूरा चौराहा तक है। इस मार्ग पर रेलवे फाटक से सदर चौक, घास बाजार, संस्कृत पाठशाला, बल्ली पुरा और औरंगाबाद तक का इलाका आता है। मार्ग पर सुबह साढ़े नौ से लेकर देर रात तक जाम लगा रहता है। कुछ समय पूर्व प्रशासन ने रेलवे फाटक से सदर चौक और टीसीआई मोड़ से ढेकुलियाघाट बंधा रोड पर वन वे की व्यवस्था तय की थी। लेकिन मौजूदा समय में इसका पालन सही तरीके से नहीं कराया जा रहा। ऐसे में टेंपो और निजी वाहन बाल निकेतन क्रासिंग से शहर कोतवाली रौजा होते हुए सदर चौक तथा आगे की ओर धड़ल्ले से दौड़ रहे हैं। जिससे जाम लग जा रहा है और लोग परेशान हो रहे हैं। टीसीआई मोड़ पर मिर्जाहादीपुरा चौराहे की ओर आने वाले वाहनों को तो कभी कभी बंधा रोड की ओर मोड़ दिया जाता है लेकिन बालनिकेतन क्रासिंग से टेंपो और छोटे वाहनों को बंधा रोड से सदर चौक अथवा मिर्जाहादीपुरा की ओर से जाने के लिए नहीं मोड़ा जाता है। लोगों का कहना है कि अगर प्रशासन के पहले के आदेश का पालन ठीक तरह से किया जाए और रोडवेज की ओर से सदर चौक की ओर से जाने वाले टेंपो और छोटे वाहनों को बंधा रोड से आगे की ओर भेजा जाए और मिर्जाहादीपुरा की ओर से आने वाले वाहनों को टीसीआई मोड़ से बंधा रोड से आगे की ओर भेजा जाए तो शहर में जाम की समस्या से निजात मिल सकती है। रोडवेज से आजमगढ़ तिराहे तक लगने वाले जाम पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासन ने फाटक की ओर से आने वाले सभी वाहनों को रोडवेज से रेलवे स्टेशन रोड से मोड़कर ओवर ब्रिज मुंशीपुरा मोड़ तिराहे से होकर आगे की ओर जाने की व्यवस्था की थी। लेकिन अब इसका पालन नहीं हो रहा। रोडवेज बसें भी रात आठ बजते ही बाल निकेतन क्रासिंग पार कर ढेकुलियाघाट पुल, लक्ष्मी नारायण तिराहा होते हुए बलिया मोड़ निकल जाती हैं। रूट डायवर्जन अथवा वनवे का पालन कराने, शहर में यातायात व्यवस्था सुगम बनाने के लिए नगर पालिका, प्रशासन, परिवहन, टेंपो यूनियन, व्यापार मंडल, राजनीतिक दल और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय होना जरूरी है। लेकिन ऐसा नहीं है। नतीजा सामने है। जाम से निजात के लिए जब बैठक बुलाई जाती है तो सरकारी अधिकारी उस बैठक में जाना जरूरी नहीं समझते। पालिकाध्यक्ष तैयब पालकी और पूर्व पालिकाध्यक्ष अरशद जमाल कहते हैं कि एक बार सभी लोगों की बैठक बुलाई गई थी लेकिन कोई अधिकारी नहीं आया। सिटी मजिस्ट्रेट त्रिभुवन ने बताया कि जाम से निजात के लिए पहले से तय गाइड लाइन का पालन सख्ती से कराया जाएगा। तय डायवर्जन का पालन न करने वाले वाहनों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।