मऊ। किसान संगठनों के राष्ट्रव्यापी प्रतिरोध के तहत शुक्रवार को किसानों ने जुलूस निकालते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। जहां राष्ट्रपति को संबोधित दस सूत्रीय मांग पत्र जिलाधिकारी अमित सिंह बंसल को सौंपा। पत्रक सौंपने के बाद एक सभा का आयोजन किया गया।
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा तीन कृषि कानूनों, बिजली कानूनों और चार श्रम संहिताओं ने भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी ढांचे को उलट पलट कर रख दिया है। इस पारित कानूनों से वह किसानी खत्म हो जाएंगे जो हमारी दो तिहाई जनता के लिए रोटी मुहैया कराती है। कहा कि सरकार ने इस जनविरोधी कदम को पीछे नहीं हटाया तो देश का किसान आंदोलन और तेज करेगा।
किसान नेताओं ने कहा कि लॉक डाउन के प्रावधानों का दुरुपयोग कर आम जनता, किसानों मजदूरों का लगातार दमन किया जा रहा है। महंगाई आसमान छू रही है बेरोजगारी दिन दुगना रात चौगुना बढ़ रही है।सरकार की बौखलाहट का पता इससे चलता है कि विधेयक को पारित करने के लिए सांसदों को मत विभाजन की मांग करने के उनके संवैधानिक अधिकार से भी वंचित कर दिया गया ह्रै।
कहा कि 26-27 नवंबर को किसान विरोधी कृषि कानूनों का प्रतिरोध कर रहे किसानों पर आंसू गैस, पानी की बौछार और लाठियां चलाई गई हैं। जो कि काफी निंदनीय है। वक्ताओं ने सरकार से किसान विरोधी कानून को तत्काल वापस लेने,बिजली कानून 2020 को रद्द करने, डीजल का दाम आधा करने, ठेका खेती रद्द करने सहित दस मांग की। जुलूस में अखिल भारतीय किसान सभा किसान महासभा, किसान संग्राम समिति, उत्तर प्रदेश किसान सभा, ऑल इंडिया किसान फेडरेशन, अखिल भारतीय किसान खेत मजदूर यूनियन, इंकलाबी मजदूर केंद्र संगठन शामिल रहा। सभा को राम कुमार भारती, अर्चना उपाध्याय, देवेंद्र मिश्रा, विरेंद्र कुमार, जयप्रकाश धूमकेतु, बसंत कुमार ,रामनवल सिंह,शेर मोहम्मद, गुफरान आदि किसान नेता मौजूद रहे।