रतनपुरा। ब्लाक क्षेत्र के नगवां ग्राम पंचायत में हुई अनियमितताओं की पुष्टि होने के बाद भी आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई न होने से ग्रामीणों में रोष है। मामले में शिकायतकर्ता की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। हाई कोर्ट ने अब तक की गई कार्रवाई का विवरण 27 फरवरी तक उपलब्ध कराने का आदेश दिया है। ग्रामीणों ने 4 अक्टूबर 2017 को मनरेगा योजना के तहत 14वां वित्त के 62 लाख रुपयों के धन के बंदरबांट के शिकायत जिलाधिकारी से की थी। डीएम ने तत्कालीन बीडीओ फैसल आलम को जांच का आदेश दिया था। बीडीओ ने त्रिस्तरीय कमेटी का गठन कर जांच करायी तो शिकायत सही मिली। उसके बाद जिलास्तरीय तीन सदस्यीय तकनीकी जांच टीम ने छह बिंदुओं की जांच की। टीम ने भी 12 लाख 69 हजार दो सौ रुपयों की वित्तीय अनियमितताएं पाई। अभी 19 बिंदुओं पर जांच लंबित है। उधर 21 मई 2018 को जांच टीम की रिपोर्ट पर तत्कालीन जिलाधिकारी प्रकाश बिंदु ने ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत अधिकारी एवं तकनीकी सहायक पर धन वसूली व मुकदमा दर्ज करने का आदेश 25 मई 2018 को दिया। ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और राज्यपाल तक को पत्र भेजा। लेकिन मामला सिफर रहा। कार्रवाई न होते देख शिकायत कर्ताओं ने उच्च न्यायालय की शरण ली। जिसमें जिलाधिकारी, डीसी मनरेगा , डीपीआरओ और बीडीओ को पार्टी बनाया गया है। हाई कोर्ट ने इस मामले में अब तक की गई कार्रवाई का विवरण 27 फरवरी तक जमा करने का आदेश दिया है। उधर भूतपूर्व सैनिक संगठन ब्लाक ब्लाक अध्यक्ष परमात्मा नंद सिंह, रामायण चौहान,राजेंद्र सिंह, गिरजा शंकर सिंह आदि लोगों का कहना है कि आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं हुई तो अगले माह लोकायुक्त के दरबार में गुहार लगाएंगे।
डीपीआरओ घनश्याम सागर ने बताया कि उच्च न्यायालय को नगवा गांव की जांच और अब तक की कार्रवाई का विवरण भेज दिया गया है। जांच समिति के अध्यक्ष डीडीओ विजयशंकर राय ने अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को दे दी है।