मुहम्मदाबादगोहना। जब जन्म जन्मांतर के पुण्य फल उदित होते हैं, तब देव कार्य करने का सौभाग्य प्राप्त होता है। संतों का सानिध्य श्रद्धा भाव के अतिरेक के अधीन है। देवालय निर्माण, विग्रह स्थापन, प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव, संत दरश और पूजन-अर्चन के भाव हमारे अन्तस को ईश्वरार्पण की ओर ले जाता है। भगवान शिव के प्रति समर्पण ही जीवन का परम लक्ष्य है क्योंकि शिव के परे कोई तत्व नहीं है। ये बातें स्वामी ज्ञानानंद सरस्वती ने नेवादा स्थित नवनिर्मित शिव मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में कहीं। श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए स्वामी जी ने कहा कि आप सबकी अपार आस्था की भावपूर्ण उपस्थित और पुण्य पुंज से ही इस देवालय का निर्माण हुआ है। यह खाली ईंट और कंक्रीट नहीं है। सृष्टि आरंभ से लेकर जब जीव शरीर धारण किया तबसे लेकर अबतक के शुभ कर्मों का फल आपको इस तीर्थ देवालय के रूप में प्राप्त हुआ है। स्वामी जी ने बताया कि ऐसे जीव को धिक्कार है जो प्रात: सूर्यार्घ नहीं देता, आसपास स्थित देवालय में दर्शन-पूजन नहीं करता। आप सभी पुण्य के भागी हैं कि कई पुश्तों के बाद आपको अपने गाँव के देवालय में पूजन-अर्चन करने का सौभाग्य प्राप्त होगा।कार्यक्रम का संयोजन प्रभुनाथ राम, संचालन राधेश्याम गुप्ता एवं धन्यवाद ज्ञापन यज्ञ के मुख्य यजमान वकील यादव ने व्यक्त किया। इस दौरान प्रमुख रूप से हरिओम शरण चौबे, अरुण त्रिपाठी, यादवेंद्र तिवारी, आशीष चौधरी, इंद्राज यादव, श्याम चौबे, विजय दास, किशुन चौहान, जितेंद्र यादव, शैलेन्द्र त्रिपाठी, सुरेन्द्र यादव, प्रमोद यादव आदि मौजूद रहे।