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Mau News: छह लोग सूडान से सकुशल लौटे घर

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मऊ। गृह युद्ध की हिंसा में सुलगते सूडान से भारतीयों को भारत सरकार ऑपरेशन कावेरी के तहत देश वापस ला रही है। सूडान में फंसे मुहम्मदाबाद गोहना ब्लाक के इटौरा चौबेपुर निवासी घूरा राम रावत, रतनपुरा ब्लाक के गुलौरी गांव निवासी आलोक कुमार सिंह, उमरपुर गांव निवासी ओम प्रकाश गिरी और रानीपुर ब्लाक क्षेत्र के पलिया गांव निवासी परवेज समेत छह लोग रविवार को सकुशल घर पहुंच गए। इससे उनके परिवारों ही नहीं, गांवों में उत्सव का माहौल है। सभी ने मोदी सरकार का आभार व्यक्त करते हुए वंदेमातरम और भारत माता के जयकारे लगाए।वलीदपुर : मुहम्मदाबाद गोहना ब्लॉक के इटोरा चौबेपुर गांव निवासी घूरा राम रावत भारत सरकार की मदद से रविवार को अपने घर सुरक्षित पहुंचे तो परिवार में जश्न का माहौल रहा।इटौरा चौबेपुर गांव निवासी घूरा राम रावत पुत्र चंद्रदेव राम रावत जो लगभग चार साल से सूडान में रहकर वनप्लस आयल कंपनी में फिल्टर करने का काम करते थे। वे छह महीना छुट्टी बिताने के बाद वापस तीन जनवरी 2023 को सूडान अपने कंपनी में पहुंचे। बताया कि सूडान में लड़ाई लगने के बाद कंपनी में कुछ दिनों तक खाना पानी मिलता रहा। इसके बाद कंपनी ने हाथ खड़ा कर लिया। डर के वजह से घूराराम रावत ने इसकी सूचना किसी तरह से भारतीय दूतावास को दी। अधिकारियों ने 26 अप्रैल को अपने एंबेसी में लेकर चले आए 27 अप्रैल को कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद भारतीय सेना के हवाई जहाज द्वारा 28 अप्रैल को जेद्दा पहुंचाया। वहां से इंडिगो एयरलाइंस द्वारा 29 अप्रैल को दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरने के बाद ट्रेन द्वारा रविवार को सुबह 11 बजे अपने घर इटौरा चौबेपुर पहुंचे तो परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। रतनपुरा: क्षेत्र के गुलौरी ग्राम पंचायत निवासी आलोक कुमार सिंह और उमरपुर ग्राम पंचायत निवासी ओम प्रकाश गिरी जब अपने गांव पहुंचे। वे अपनी सकुशल वापसी के लिए भारत सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। कहा कि संकट के समय में सरकार ने जिस प्रकार मदद की है वह अभूतपूर्व है। आलोक कुमार सिंह 16 महीने से ओम प्रकाश गिरी पिछले तीन साल से सूडान की राजधानी खारतून में स्टील प्लांट में कार्यरत रहे। अचानक 16 अप्रैल को गोलियों की तड़तड़ाहट और बमबाजी ने हिला कर रख दिया। दोनों युवकों ने बताया कि उस समय हम लोग अपने आवास पर थे। हम दोनों काफी डर गए थे क्योंकि गृह युद्ध की आग ने सूडान की राजधानी को अपने चपेट में ले लिया था। किसी तरह तीन दिन बीतने के बाद भारतीय दूतावास से संपर्क हुआ और सूडान की राजधानी खार्तून से आवासीय परिसर से हम लोगों को बस से समुद्र के तट पर पहुंचाया गया। वहां से पानी के जहाज से 12 घंटे सफर करने के बाद हम लोग जेद्दा पहुंचे, जहां इंटरनेशनल स्कूल में हम लोगों को रखा गया। वहां से हवाई जहाज से दिल्ली लाया गया। दिल्ली में उत्तर प्रदेश भवन हम लोगों के रुकने की व्यवस्था की गई थी। वहां से उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की बस से हम घर पहुंचे। दोनों ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार की जमकर तारीफ की। वहीं, परिजनों ने दोनों का स्वागत किया और सरकार के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। जो बेचैनी परिवारों में थी, वह उत्सव में बदल गई।
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इसी तरह रानीपुर: ब्लाक क्षेत्र के पलिया गांव निवासी परवेज पुत्र नेसार सकुशल अपने गांव पहुंचे तो परिवार में उत्सव का माहौल हो गया। परवेज जनवरी 2022 में सूडान के खारतूम शोबा इंडस्ट्रियल एरिया में फार्मा कंपनी में कोटिंग ऑपरेटर का काम करते थे। परवेज ने बताया कि अचानक शुरू हुई गोलीबारी से लोग दहशत में थे।किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था। चारों तरफ गोलीबारी हो रही थी और एयरक्रॉफ्ट से बम गिराये जा रहे थे। लग रहा था कि अगले ही पल कहीं से गोली चलेगी और मेरी जान चली जाएगी। लड़ाई शुरू होने के नौ दिन बाद कंपनी ने कंबोडियन कॉलेज भेजा, जहां सैकड़ों भारतीय नागरिकों को ठहराया गया था। वहां से दो दिन बाद उन्हें पोर्ट सूडान भेजा गया। भारतीय दूतावास ने वहां से हवाई जहाज से सऊदी अरब भेजा। फिर वहां से दिल्ली आया। रविवार की सुबह घर पहुंचकर चैन की सांस ली। उन्होंने भारत सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया।
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