मऊ। अंबेडकर विद्यालयों में छात्रों की संख्या के अनुपात में अधिक शिक्षकों की नियुक्ति की शिकायत शासन तक पहुंच गई है। शासन द्वारा मंगाई गई रिपोर्ट में छात्र संख्या और अध्यापकों की संख्या को देखते हुए प्रमुख सचिव समाज कल्याण ने हैरानी जताई। शासन अब छात्र संख्या के अनुपात से अधिक तैनात अध्यापकों को अधिक छात्र संख्या वाले विद्यालयों में समायोजित करने का शासनादेश जारी किया है। समाज कल्याण विभाग अब ऐसे विद्यालयों और अध्यापकों का विवरण तैयार करने में जुटा है।
जनपद में समाज कल्याण की ओर 56 अनुदानित आंबेडकर प्राथमिक विद्यालय संचालित हो रहे हैं। इनमें लगभग साढ़े तीन सौ अध्यापक कार्यरत हैं। अधिकतर आंबेडकर विद्यालयों पर छात्रों की की संख्या काफी कम है। लेकिन पूर्व में छात्र संख्या अधिक दिखाकर प्रबंधकों ने अध्यापकों की नियुक्तियां कर रखी हैं। अध्यापकों की नियुक्तियों में अनियमितता की शिकायत मिलने पर शासन की ओर से छात्रों और अध्यापकों की रिपोर्ट मंगाई गई। जिलों से भेजी गई रिपोर्ट में कई तथ्य संदेहास्पद पाए गए। कई विद्यालयों में छात्रों की संख्या अधिक दर्शायी गई थी। शासन की ओर से आदेश जारी किया गया कि सरप्लस अध्यापकों को अधिक छात्र संख्या वाले स्कूलों में समायोजित किया जाएगा। इस आदेश में यह शर्त भी है कि जिस विद्यालय से अध्यापक को हटाया जाएगा और जिस विद्यालय पर भेजा जाएगा इन दोनों विद्यालयों के प्रबंधकों की सहमति जरूरी होगी। हालांकि इसकी कवायद अभी शुरू नहीं की गई है।
30 छात्रों पर एक अध्यापक के पद का है मानक : मऊ। इन आंबेडकर विद्यालयों पर छात्र अध्यापक अनुपात का नियम परिषदीय विद्यालयों वाला 30 छात्रों पर एक अध्यापक का है। लेकिन इन स्कूलों में अध्यापकों की नियुक्ति का अधिकार प्रबंधक के पास है। कहने को तो चयन तीन सदस्यीय समिति करती है लेकिन प्रबंधक की ही चलती है।