घोसी तहसील क्षेत्र अन्तर्गत तीन मदरसों के अध्यापकों का वेतन और सभी प्रकार की दी जाने वाली सहायता राशि पर स्थायी रूप से रोक लगा दी गयी। यह कार्रवाई स्थलीय निरीक्षण में इन मदरसों में ताले बंद रहने और एक भी छात्र मदरसे में उपस्थित न मिलने के चलते की गयी है। इन मदरसों में कुल 21 शिक्षक हैं।घोसी कस्बे के पास मदरसा एसातुल ओलूम अहमदपुर असना संचालित है। गुरुवार को जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी डॉ. विजय प्रताप यादव, नायब तहसीलदार श्री भगवान पाण्डेय और खण्ड शिक्षा अधिकारी अनिल मिश्रा के साथ एसातुल ओलूम अहमदपुर असना मदरसे पर पहुंचे।
उस समय मदरसे में कोई छात्र था न ही कोई शिक्षक बल्कि मदरसे में बाहर से ताला बंद था। इस मदरसे को वर्ष 2000 में आलिया स्तर की मान्यता प्रदान की गयी थी लेकिन छात्र उपस्थिति की सत्यापन रिपोर्ट के अभाव में वेतन भुगतान पर अस्थाई रूप से रोक लगाई गयी है। इसी प्रकार मदरसा नदनिया नुरूल ओलूम रघौली में भी कोई भी छात्र अथवा शिक्षक नहीं पाये गये। जबकि एक अन्य मदरसा सैय्यदा हसन मॉडल स्कूल वनगांवा, मानिकपुर हड़हुआं में भी स्थलीय निरीक्षण में कोई छात्र अथवा अध्यापक मौजूद नहीं मिला। इस संबंध में जिला अल्प संख्यक कल्याण अधिकारी ने बताया कि तीनों मदरसों की स्थिति अत्यन्त दयनीय है। इनमें छात्रों के न रहने की शिकायतें मिलती रही हैं। तीनों मदरसों की सत्यापन रिपोर्ट भी नहीं मिल रही थी। इसलिये तीनों मदरसों का स्थलीय निरीक्षण किया गया जिसमें ये सारे तथ्य उजागर हुये।
उन्होंने तीनों मदरसों के शिक्षकों के वेतन सहित सभी प्रकार की सुविधाओं पर अस्थाई रूप से रोक लगाने के निर्देश जारी कर दिये हैं। साथ ही उन्होंने मदरसा प्रबंधकों को समस्त कागजात के साथ तलब किया है।