जिला प्रशासन ने लंबी कवायद के बाद तमसा के दर्द को समझा। अब तमसा को निर्मल बनाया जाएगा, घाटों को सुंदरीकरण कर रमणीय बनाया जाएगा। अमर उजाला ने अपने ‘तमसा के दर्द’ अभियान में तमसा की बदहाली को प्रमुखता से प्रकाशित कर प्रशासन के साथ ही लोगों का ध्यान मुद्दे की तरफ आकर्षित किया। रविवार को जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव की पहल पर कलेक्ट्रेट में आयोजित बैठक में इस अभियान को सभी ने हाथों हाथ लिया और अभियान का नाम निर्मल तमसा रखा।
बैठक में नगर के बुद्धिजीवी, स्वयंसेवी संगठनों, रोटरी क्लब, आईएमए आदि ने तमसा की सफाई के पूर्व नदी के किनारों पर फेंके जाने वाले नगर के कूड़े निस्तारण पर रोक की बात की। इसी प्रकार नदी में गिरने वाले नालों के पानी को रोका जाए। इसके लिए पूर्व में बने चार नालों में चैंबरों की संख्या बढ़ाई जाए।
नगर में जहां कहीं भी नाले गिर रहे हैं, वहां चैंबर बनाए जाएं और नालों परे मजबूत जाली लगाई जाए। नाले में जो गंदा पानी है वह चैंबर में इकट्ठा होने के बाद फिर दूसरे गड्ढे से होकर में नदी में प्रविष्ट करे। इस पर जिलाधिकारी ने नगरपालिका को निर्देश दिया कि इससे संबंधित कार्ययोजना बनाकर इस पर कार्य कराया जाए। इसके अलावा भीटी पुल से 50 मीटर पूरब से लेकर हनुमान घाट तक घाटों पर मिट्टी पाटकर उसे घाट का रूप दिया जाए और उस पर ईंट की इंटरलाकिंग कराकर घाटों का रूप दिया जाए ताकि नदी का किनारा स्वच्छ बने। साथ ही इन घाटों पर जगह-जगह समतलीकरण कर पौधरोपण किया जाए। पेड़ों पर चबूतरा एवं उन्हं ब्रिकगार्ड लगाकर सुंदरीकरण का रूप दिया जाए।
साथ ही जगह-जथगह सीमेंटे से बैठने का स्थान बनाया जाए ताकि नदी किनारे शहर के लोगों का निकास हो और वह एक रमणीय स्थल नदी के किनारे बैठकर प्राकृतिक सौंदर्य का आंनद ले सकें। लोगों का आवागमन इन स्थानों पर होने, उठने-बैठने एवं सैर सपाटे इन स्थानों पर लोग गंदगी करने की भी हिम्मत नहीं करेंगे।
इस सुझाव पर जिलाधिकारी ने नगरपालिका से लेकर ईंट भट्ठा संघ सहित पीडब्लूडी आदि के ठेकेदारों से सहयोग की अपेक्षा की एवं उन्हें जिम्मेदारी सौंपी। इसके अलावा तमसा में अविरल पानी रहे इसके लिए लोगों ने दोहरीघाट के निकट बने च्यूटीडाड़ में बने बंधे पर एक पुलिया के निर्माण कराकर छोटी नदी में घाघरा के पानी के अवरुद्ध किए जाने को पुन: चालू कराया जाए ताकि पूरे साल तमसा में पानी रह सके। यह भी सुझाव दिया कि अत्यधिक पानी या बाढ़ की संभावना पर उस पुलिया पर एक चैनल भी बनाया जाए
ताकि परेशानी होने पर उसे बंद किया जाए। जिलाधिकारी ने इस मामले में सिंचाई विभाग को निरीक्षण कर रिपोर्ट देने को कहा। सिंचाई विभाग द्वारा मामला आजमगढ़ का बताए जाने पर जिलाधिकारी ने रिपोर्ट प्रेषित करने को कहा। लोगों का कहना है कि इस प्रयास से ना सिर्फ सूखी छोटी सरयू में पानी आने से लोगों को इसका सिंचाई से लेकर विभिन्न प्रकार का लाभ होगा बल्कि तमसा भी निर्मल एवं अविरल होगी।