बीते 18 दिसंबर की दोपहर लखनऊ स्थित प्राइवेट अस्पताल में सुमीर कुमार की भी मौत हो गई। शुक्रवार की सुबह बेल्थरारोड शव पहुंचने पर परिजन धरने पर बैठ गए थे। मऊ डीएम को बुलाने और रामपुर थानाध्यक्ष को निलंबित करने की मांग पर अड़े थे।
इसे देखते हुए मधुबन सीओ, मधुबन न्यायिक एसडीएम दीपक कुमार ने बेल्थरारोड पहुंचकर परिजनों से मुलाकात की और हर संभव कार्रवाई का आश्वासन दिया था। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए रामपुर थाना पर मधुबन थाना, दोहरीघाट और घोसी कोतवाली की पुलिस ने सुबह से डेरा जमाया था।
षड़यंत्र के पीछे कहीं रसूखदारों का हाथ तो नहीं
आयुष और सुमीर हत्याकांड के मुख्य आरोपी का ऐसे समय पर आत्मसमर्पण करना जब दो जिलों की पुलिस कई जगहों पर दबिश दे रही थी। आजमगढ़ के डीआईजी सुनील सिंह ने शुक्रवार की शाम पीड़ित परिवारों से मिलकर मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी का आश्वासन दिया था। लेकिन दो जिलों की पुलिस को चकमा देकर रोबिन ने 24 घंटे से कम समय में नाटकीय ढंग से मऊ कोतवाली में आत्मसमर्पण में कर दिया।
सवाल ये खड़ा होता है कि वो कोर्ट में आत्मसमर्पण कर सकता था। दो जिलों की पुलिस को छकाते हुए आत्मसमर्पण पर सोशल मीडिया पर अलग अलग प्रतिक्रिया होती रही। कई ने तो इसके पीछे रसूखदारों का हाथ होना बताया। कुछ ने दोनों जिलों के लोगों के रसूखदारों की साठ गांठ बताई।
फिल्मी स्टाइल में कार से पहुंचा कोतवाली, बनाता रहा वीडियो
रोबिन फिल्मी स्टाइल में कार में बैठकर बहन के साथ मऊ कोतवाली पहुंचा। वो रास्ते भर मोबाइल से वीडियो बनाता रहा और सोशल मीडिया पर भेजता रहा। वायरल वीडियो में रोबिन ने बोला दुश्मनी के कारण उसे फंसाया जा रहा है, उसके पास इस संबंध में सबूत है। पुलिस परेशान कर रही थी। पुलिस अधीक्षक और बड़े अधिकारियों के कहने पर मैं मऊ कोतवाली में आत्मसमर्पण कर रहा हूं। पुलिस इस मामले में जांच करे, यदि मैं दोषी हूं तो मुझे सजा मिले और निर्दोष हूं तो मुझे परेशान न किया जाए।