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Mau News: किसानों के लिए काफी फायदेमंद हो सकती है सूरजमुखी की फसल

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मऊ। देश में तिलहन की बढ़ती हुई मांग को पूरा करने के लिए सूरजमुखी की फसल काफी फायदेमंद हो सकती है। सूरजमुखी की खेती भारत में लगभग 1.48 मिलियन हेक्टेयर में फैली हुई है, जिसकी औसत उपज 0.6 मीट्रिक टन प्रति एकड़ है। कृषि विज्ञान केंद्र की तरफ से सूरजमुखी की फसल प्रजाति माडर्न सूर्या पर शोध करने के लिए 1.25 हेक्टेयर क्षेत्रफल पर पांच किसानों नीरज राय, भोला यादव, विनेश कुमार, हरिनारायण राय एवं सतीश राय ग्राम बसारथपुर विकास खंड बडरांव को संपूर्ण पैकेज उपलब्ध कराया गया है।
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इस संबंध में कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एलसी वर्मा ने बताया कि जायद का सीजन चल रहा है। गर्मी में फसलों की अधिक पानी की मांग तथा नील गाय एवं छुट्टा पशुओं की वजह से जायद की फसलों के क्षेत्रफल में कमी आयी है। ऐसी स्थिति में किसान जायद में सूरजमुखी की खेती कर अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं। इससे उन्हें कम लागत में अधिक मुनाफा भी मिलेगा।
केंद्र के फसल सुरक्षा वैज्ञानिक लाल पंकज सिंह ने बताया कि इस समय सूरजमुखी की फसल में फूल आ रहे हैं। सूरजमुखी की फसल प्रकाश संवेदी होती है। इसकी बुवाई जायद के सीजन में करनी चाहिए। किसानों को जागरूक करने के लिए किसानों के प्रक्षेत्र पर शोध ट्रायल लगाया गया है। जागरूकता के लिए केंद्र पर भी सूरजमुखी का प्रदर्शन लगाया गया है। शस्य वैज्ञानिक डॉ. अंगद प्रसाद ने कहा कि सूरजमुखी से अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए परागण का होना आवश्यक है। मधुमक्खियां शहद उत्पादन के साथ परागण भी करती हैं। सूरजमुखी के फूल से प्रचुर मात्रा में शहद का उत्पादन किया जाता है। यह मधुमक्खी पालकों के लिए अधिक फायदेमंद है।
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