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मिल बंदी से बेरोजगारी के साथ बढेग़ी किसानों की दुश्वारियां

Mon, 30 Jan 2017 12:06 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,मऊ
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मिल ने नए सत्र में की 52 हजार क्विंटल गन्ने की पेराई - फोटो : पीलीभ्‍ाीत/उत्‍ततर प्रदेश्‍ा
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गंगा और उसकी सहायक नदियों में प्रदूूषण के चलते केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा सात डिस्टलरी यूनिटों को बंद करने का आदेश दिया है। इसमें घोसी स्थित द किसान सहकारी चीनी मिल भी शामिल है। चीनी मिल के बंद करने के फरमान से एक बारगी जिले में हड़कंप मच गया है। मिल बंद होने के चलते जहां मजदूरों में बेरोजगार होने को लेकर बेचैनी बढ़ गई है। वहीं  किसानों की भी दुश्वारियां बढ़ने की आशंका प्रबल हो गई है। मिल बंद होने से आठ हजार से ज्यादा किसान प्रभावित होंगे।
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 घोसी चीनी मिल क्षेत्र में आठ हजार से अधिक गन्ना किसान हैं। एक जमाना था जब परदहां काटन मिल तथा स्वदेशी काटन मिल से बुनकरों को कम दाम पर आसानी से धागा मिल जाता था। दोनों मिलें दशकों से बंद चल रही है। इसके चलते जिले की विकास गति पर विपरीत असर पड़ा है। ऐसे में केंद्रीय नियंत्रण प्रदूषण बोर्ड द्वारा घोसी की द किसान सहकारी चीनी मिल को बंद करने के फरमान से मिल कर्मचारियों के साथ जिले के किसानों की दुश्वारियां बढ़ने की आशंका प्रबल हो गई है। जिले के गन्ना किसानों की खुशहाली के लिए घोसी में किसान सहकारी चीनी मिल की स्थापना की गई। शुरुआत में इसकी क्षमता 15 हजार कुंतल प्रतिदिन  थी। जिसको वर्ष 1993 में बढ़ा कर 25 हजार कुंतल प्रतिदिन कर दिया गया। मिल को भरपूर गन्ना न मिलने तथा प्रदेश सरकार का सहयोग न मिलने के कारण यह घाटे में रहने लगी। आज चीनी मिल के ऊपर दो सौ करोड़ से अधिक का कर्ज है।
चीनी मिल  के डबल प्लांट होने के बाद यह दिन प्रतिदिन घाटे में चलने लगी। अब प्रदूषण के चलते केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने मिल को बंद करने का फरमान जारी कर दिया है। मिल में आसवानी की स्थापना के बाद इसके गंदे पानी को साफ कर नाला के द्वारा  बहाने के लिए इसके प्रांगण में 1993 में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना तो की गई। परंतु वह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। छह माह  पूर्व इसके प्रांगण में एथेनॉल प्लांट के शिलान्यास के समय जीरो  लिक्विड डिस्चार्ज प्लांट लगाने की बात कही तो गई परंतु अबतक मूर्त रूप नहीं दिया जा सका है। शासन प्रशासन की उदासीनता का खामियाजा गन्ना किसानों तथा मिल कर्मचारियों को भुगतना पड़ेगा। मिल बंद होने से गन्ना किसानों को जहां काफी नुकसान होगा। वहीं मिल के 539, फेडरेशन के 31 कर्मचारियों के साथ डिस्टिलरी के 70 कर्मचारियों, मजदूरों में रोजी रोटी रोटी पर खतरा मंडराने लगा है।
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प्रभावित होंगे आठ हजार से अधिक गन्ना किसान
 घोसी  (ब्यूरो)।  चीनी मिल क्षेत्र में आठ हजार से ऊपर गन्ना किसान हैं। चीनी मिल में 108 स्थायी, 177 सीजनल,  254 दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी के साथ फेडरेशन के 31 कर्मचारी हैं। वहीं आसवानी में 70 कर्मचारी हैं और दो अधिकारी हैं। आसवानी की उत्पादन क्षमता 30 हजार बल्क लीटर है।
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