लगातार घाघरा का जलस्तर खतरा बिंदु पर स्थिर रहने से कस्बा तथा तटवर्ती इलाके के लोगों की धड़कनें बढ़ती ही जा रही है। मुक्तिधाम के दक्षिणी छोर पर घाघरा की कटान जारी होने से पूरा मुक्तिथाम कटान की चपेट में आने से लोगों के होश उड़ गये है। तटवर्ती इलाकों की हजारों एकड़ फसलों के डूबे रहने से फसल नष्ट होने की चिंता किसानों को सताने लगी है। नदी के कहर बरपाने के बाद भी कटान की समस्या का समाधान ढूढा नहीं जा सका है।
लगातार पांच दिनों से घाघरा का जलस्तर स्थिर होने के बाद भी नदी कहर बरपा रही है। कटान जारी रहने से लोगों की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही है। नदी का जलस्तर 69.90मीटर रहा। गौरीशंकर घाट पर खतरे का निशान 69.90मीटर आंका गया है। कटानपीड़ितों की मानें तो 22 करोड़ कटान रोकने के नाम पर नाबार्ड से आये धन से पिचिंग स्पर लांचिंग रामपुर धनौली से लेकर मुक्तिधाम तक हुआ लेकिन मुक्तिधाम से 90 मीटर पहले ही पिचिंग का कार्य पूरा कर दिया गया।
इसके बाद से ही मुक्तिधाम पर कटान शुरू हो गयी जिससे मुक्तिधाम संस्थान परिवार के होश उड़ गये।आनन-फानन में संस्थान के पदाधिकारियों ने कटान रोकने के लिए शासन प्रशासन को अवगत कराया। लेकिन अभी तक कटान समस्या का समाधान नहीं किया जा सका है। हालत यह है कि मुक्तिधाम शवदाह का आधा सेड व चबूतरा नदी की धारा में विलीन हो गया। सिचाई विभाग के अधिशासी अभियंता द्वारा मुक्तिधाम को बचाने का दावा किया जा रहा है।
कटाने के मुहाने पर बोरियों में ईट भरकर लगाया जा रहा है।10 हजार बोरियों की ईट भर कर मुक्तिधाम पर डंप किया गया है। वहीं भारत माता मन्दिर को बचाने के लिए पूरी तरह बोल्डर की पिचिंग करायी गयी है। इधर लगातार पांच दिनों से घाघरा के उग्र होने से अवराडांड, रामनगर, चिऊंटीडांड़, सरहरा, नईबाजार, छुतिहार, धनौली रामपुर, कस्बा पतनई बहादुरपुर, गोधनी, ठाकुरगांव, सरया, बीबीपुर, समेत आदि तटवर्ती इलाकों के लोगों में दहशत व्याप्त है।