क्षेत्र के माधोपुर गांव में चल रहे तीन दिवसीय मानस सम्मेलन में बुधवार को व्यास अखिलेशमणि शांडिल्य ने कहा कि तपस्वियों को राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों से जुड़ना चाहिए ।
ताकि उनकी तपोशक्ति का सदुपयोग देश और समाज हित में हो सके। कहा कि मनुष्य की शरीर पाने का उद्देश्य है मानवता का निर्वहन कराना।
इन्हीं नैतिक गुण-कर्मों के जरिए देश और समाज की सेवा किया जा सकता है। इस राह को अपनाने में काफी-कठिनाई आती हैं। इसका बहादुरी पूर्वक सामना करते हुए सत्कर्म अभियान को संपन्न करने के लिए काफी संघर्ष की आवश्यकता होती है ,जिसके लिए शक्ति चाहिए।
उच्चकोटि की शक्ति आध्यात्मिक शक्ति होती है।जो भगवत्भक्ति से ही प्राप्त होती है । कहा कि समाज से दूर होकर या नाता तोड़कर तपस्वी जीवन अपनाने में मानव जीवन समग्र सार्थकता नहीं।