परिषदीय विद्यालयों में शैक्षिक कैलेंडर के हिसाब से अक्तूबर में अर्द्धवार्षिक परीक्षा होनी है लेकिन बच्चों में नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकों का वितरण नहीं किया गया है। निदेशालय से लगभग 30 प्रतिशत ही पाठ्यपुस्तकों की ही खेप आ पाई है। अभिभावकों को अपने बच्चों के भविष्य की चिंता सताने लगी है।
जिले में 1060 प्राथमिक, 442 उच्च प्राथमिक विद्यालय, 94 सहायता प्राप्त तथा 56 समाज कल्याण से संबद्ध विद्यालय हैं। विद्यालयों में 1.36 लाख बच्चों को नामांकन किया गया है। आईसीएसई, सीबीएसई की तर्ज पर शिक्षा सत्र अप्रैल माह में कर दिया गया, लेकिन बच्चों को वितरित होने वाली नि:शुल्क पुस्तकें वितरित करने के मामले में शासन प्रशासन गंभीर नजर नहीं आ रहा है।
शिक्षा सत्र का छठवां माह बीतने को है, अभी तक बच्चों में नि:शुल्क पुस्तकों का वितरण नहीं हो पाया है। विभाग की ओर से जो पाठ्यपुस्तकें बीआरसी पर भेजी भी गई हैं डंप पड़ी हुई हैँ। आधी अधूरी किताबें आने से प्रधानाध्यापक बांटने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। शैक्षिक कैलेंडर के हिसाब से पाठ्यक्रम कागज पर ही पूरा हो रहा है।
सत्र परीक्षा भी करा दी गई। विभाग की ओर से बच्चों को दी जा रही गुणवत्ता शिक्षा पर सवाल उठने लगा है। अर्द्धवार्षिक परीक्षा होने में चंद दिन शेष है, लेकिन शत प्रतिशत पाठ्यपुस्तकों का वितरण कब होगा आला अधिकारी स्पष्ट बताने को तैयार नहीं हैं।