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अंतिम सांस ले रही हैं लघु इकाइयां

Fri, 01 Sep 2017 12:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/मऊ
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गाजीपुर तिराहा स्थित औद्योगिक आस्थान में पार्क की जमीन बनी कूड़े का ढेर।
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लघु उद्योग को बढावा देने के लिए केंद्र तथा प्रदेश सरकार की ओर से चल रही योजनाएं विभागीय और प्रशासनिक मशीनरी की उदासीनता के चलते फ्लाप साबित हो रही है। जिले में चार स्थानों पर औद्योगिक आस्थान स्थापित किया गया है। सुविधाओं का अभाव और विभागीय उदासीनता से यूनिटें अंतिम सांस गिन रही है।
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नगर के गाजीपुर तिराहा स्थित औद्योगिक आस्थान के लिए स्वतंत्र फीडर बनाने के लिए वर्ष 2011 में विद्युत उपकेंद्र बन तो गया,  लेकिन बजट के अभाव मेें स्वतंत्र फीडर का मामला अधर में लटका पड़ा है। हालत यह है कि यूनिटों को 24 घंटे बिजली नहीं मिल पा रही है। सीमेेंट कंक्रीट से बने उत्पादों  पर 28 प्रतिशत जीएसटी लाद दिए जाने से चौखट यूनिटें बंद होने के कगार पर हैं।


लघु उद्यमी केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री का दरवाजा भी खटखटा चुके हैं। कपड़ा व्यवसायियों की लंबी हड़ताल के चलते व्यवसाय पर काफी असर पड़ा। अधिकारी शासन को पत्र लिखने की बात कहकर मामले से पल्ला झाड़ ले रहे हैं। लघु उद्योगों के विकास के लिए जिले में चार औद्योगिक आस्थान बने हैं। नगर के गाजीपुर  स्थित औद्योगिक आस्थान में 25 इकाई लगी हैं। यहां  शासन की ओर से यूनिटों के लिए 24 घंटे बिजली देने का प्रावधान किया गया है। लेकिन औद्योगिक आस्थान का स्वतंत्र फीडर न होने से यूनिटों को पर्याप्त बिजली नहीं मिल पा रही है।
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शासन से स्वतंत्र फीडर बनाने के लिए वर्ष 2011 मेें विद्युत उपकेंद्र बन गया, लेकिन छह वर्ष बाद भी औद्योगिक आस्थान के लिए स्वतंत्र फीडर बनाए जाने का  मामला अधर में लटका पड़ा है। यही नहीं औद्योगिक आस्थान की सड़कें वर्षो से टूटी पड़ी हैं। यूनिटों से प्रतिवर्ष टैक्स भी जा रहा है, बावजूद सड़क मरम्मत कार्य नहीं कराया जा सका है। पार्क बदहाल पड़ा है।
 इसी तरह घोसी, गरथौली में बना औद्योगिक आस्थान वीरान पड़ा  है। ताजोपुर स्थित औद्योगिक इकाई बदहाल पड़ी है।


 विभागीय उदासीनता के चलते गिनी चुुनी यूनिटें ही संचालित हैं। प्रशासन की तरफ से हर माह उद्योग बंधु की बैठक भी की जाती है, लेकिन उद्यमियों की समस्याओं के समाधान की जगह खानापूर्ति की  जा रही है। इसके चलते साड़ी उद्योग पर भी असर पड़ा है। सीमेंट कंक्रीट से बने उत्पादों पर 28 प्रतिशत जीएसटी लाद दिए जाने           से चौखट यूनिटें बंद होने के कगार पर है।
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