घाघरा का जलस्तर घटने के बाद भी कटान जारी रहने से तटवर्ती इलाके के लोगों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। प्रतिदिन उपजाऊ भूमि नदी मेें विलीन हो रही है। रविवार को भी सरहरा गांव के कई किसानों की चार बिस्वा उपजाऊ जमीन नदी में विलीन हो गई। इसके बावजूद कटान रोकने के उपाय तक नहीं किया जा सका है। दूर से ही अपने खेत की कट रही उपजाऊ जमीन को निहार रहे हैं।
नदी के जलस्तर में घटाव दर्ज होने के बाद प्रशासन राहत जहां सांस ले रहा है। वहीं सरहरा के देवारा में कटान तेज होने से तटवर्ती इलाके के लोगों की नींद ही उड़ गई है। सरहरा गांव में रविवार को भी चार विस्वा उपजाऊ जमीन नदी में विलीन हो गई। नदी के घटने बढ़ने से लोगों को अनिष्ट की चिंता सताने लगी है। घाघरा के जलस्तर पर नजर डाले तो रविवार को 24 घंटे में घाघरा का जलस्तर 25 सेमी घटाव दर्ज किया गया।
नदी 68.85 मीटर पर बह रही थी। शनिवार को नदी का जलस्तर 69.15 मीटर रहा। गौरीशंकर घाट पर घाघरा का खतरे का निशान 69.90 मीटर आंका गया है। कटान का क्रम जारी रहने से जहां नगर का मुक्तिधाम, भारतमाता मंदिर, दुर्गा मंदिर, शाही मस्जिद, डीहबाबा का मंदिर, हनुमान मंदिर तथा लोक निर्माण विभाग का डाक बंगला के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है।
वहीं तटवर्ती इलाकों रामपुर धनौली, नईबाजार, नौली चिऊटीडाड़, बहादुरपुर, सरया, पतनई, बीवीपुर, ताहिरपुर, गौरीडीह, चौराडीह, जमीरा, कोरौली, बेलौली, पाउस, चंद्राबारी, महुआबारी, रसूलपुर आदि इलाकों के लोग कटान की आशंका से दहशत में हैं। देवारा इलाके के सरहरा गांव में चार विस्वा भूमि घाघरा में समा गई। कटान पीड़ितों का कहना था कि प्रतिदिन उपजाऊ भूमि नदी में विलीन हो रही है, लेकिन कटान रोकने के नाम पर खानापूर्ति कर इतिश्री कर दी जा रही है।