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सीता चरन चोंच हति भागा...

Wed, 05 Oct 2016 11:47 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ
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अमिला में आयोजित रामलीला में करते कलाकार।
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नगर क्षेत्र की एेतिहासिक रामलीला के तहत बुधवार की शाम शीतला माता मंदिर और छोटका पोखरा के बीच रामलीला का मंचन हुआ। इस दौरान प्रभु श्रीराम द्वारा जयंत नेत्र भंग, अत्रि अनुसुईया भेंट सहित अन्य लीलाओं का मंचन किया गया।
 नंदीग्राम निवास के दौरान लक्ष्मण की अनुपस्थिति में भगवान राम स्फटिक शिला पर बैठकर सीता माता को अपने हाथों से बनाए गए फूलों के हार को पहनाते देख इंद्र के पुत्र जयंत को भगवान राम के   मर्यादा पुरुषोत्तम होने पर संदेह होता है। इस पर वह प्रभु की परीक्षा लेने के लिए जयंत कौवे का रूप धारण कर सीता माता के चरण में चोंच मारकर भाग जाता है।
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सीता माता के चरण से रुधिर की धार बहते देख भगवान राम सींक  का बाण बनाकर जयंत पर छोड़ देते हैं। जयंत अपने पीछे बाण आता देख अपने पिता इंद्र के पास पहुंच कर सारा वृत्तांत बताकर अपने प्राणों की रक्षा करने को कहता है। लेकिन इंद्र उसे राम का द्रोही बताकर शरण देने से इंकार कर देते हैं। जयंत भगकर ब्रम्हलोक फिर शिवलोक जाता है लेकिन सभी जगह से उसे निराशा ही मिलती है। तीनों लोकों में उसे बचाने वाला कोई नहीं मिलता है। उसी समय देवर्षि नारद से जयंत की मुलाकात होती है। नारद जयंत से कहते हैं कि हे जयंत अब तुम्हें केवल श्रीराम ही बचा सकते हैं इसलिए तुम उन्हीं की शरण में जाओ। जयंत राम के पास जाकर अपने द्वारा किए धृष्टता पर प्रायश्चित किया और क्षमा याचना किया। भगवान राम, जयंत को क्षमादान दे दिए। लेकिन उसकी एक आंख भंग कर देते है।  नेत्र भंग होते ही श्रद्घालु कृपालु राम के जयकारे लगाने लगे। इसके बाद भगवान चित्रकुट में रहने वाले सभी मुनियों के आश्रम पर जाते हैं जहां उनकी मुलाकात अत्रि मुनि से होती है। अत्रि मुनि के आश्रम पर अनुसुईया सीता को नारी धर्म के बारे में बताती हैं। अत्रि मुनि के आश्रम से आगे बढ़ने पर राम को रास्ते में बिराध नामका राक्षस मिलता है जिसका राम बध कर देते हैं। बिराध बध होते ही देवगण फूल बरसाने लगते हैं। इस तरह से संतों को सताने वाले दैत्यों का संहार और ऋषि मुनियों से आशीर्वाद प्राप्त करते हुए प्रभु, श्रीराम, सीता मैय्या और लखन लाल पंचवटी की तरफ प्रस्थान कर जाते हैं। अंत में आरती की जाती है।
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