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शो पीस बना है मत्स्य बीज केंद्र

Sat, 29 Aug 2015 11:36 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ
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 ब्लाक क्षेत्र के हाजीपुर  गांव में स्थित जिले का एक मात्र उच्चीकृत मत्स्य बीज उत्पादन केंद्र सरकार की उदासीनता के चलते शो पीस बनकर रह गया है। हालत यह है कि 2013-14 में बजट के अभाव में मत्स्य पालकों की प्रशिक्षण कार्यशाला तक आयोजित नहीं की जा सकी है।
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हाजीपुर गांव में राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे मत्स्य बीज पालन केंद्र का शिलान्यास  तत्कालीन पशुधन व मत्स्य मंत्री फागू चौहान ने 24 अगस्त 2001 को किया था। 9.89 लाख की लागत से मत्स्य बीज पालन केंद्र बना तो लोगों में बेहतर रोजगार मिलने की आस जगी, लेकिन लोगों के सपने पर ग्रहण लग गया। इसमें प्रशिक्षण भवन, प्रशासनिक भवन के साथ मत्स्य बीज उत्पादन का सिस्टम बनाया गया। लेकिन स्टाफ की कमी व धन के अभाव में बीज ब्रिडिंग नहीं हो रही है। यहां पर पांच मछुआ की जगह दो की तैनाती है। चौकीदार की नियुक्ति तक नहीं है। लाखों खर्च के बाद भी यहां पर गोरखपुर से स्पान लाकर या बहुत छोटे मछली के बच्चे लाकर तालाबों में रखकर बढ़ाकर बेचा जाता है। मत्स्य बीज को लाकर रख रखाव कर बड़ा करने पर 70 प्रतिशत बच्चे मर जाते हैं। बीज की लागत भी अधिक पड़ती है। वहीं केंद्र के आसपास कई लोग  मत्स्य बीज बेचने का कार्य कर रहे हैं जो यहां से कई गुना मत्स्य बीज बेच रहे हैं। बंगाल से आकर मत्स्य बीज बेचने वाले छक्कन चौधरी ने बताया कि हाजीपुर से लेकर पिढवल, गोठा के पास एक दर्जन लोग सड़क के किनारे गड्ढा खोदकर मत्स्य बीज बेच रहे हैं। सीजन में कई कुंतल मत्स्य बीज बेच लेते हैं। इससे 20 से25 प्रतिशत मत्स्य बीज ही मरते हैं। इसी क्रम में क्षेत्र के वीरेंद्र यादव, झिनाऊ भाई,  रामसमुझ, इंदल चौहान,  रमेेश निषाद, कैलाश साहनी का कहना था कि मत्स्य उत्पादन में बड़ी संख्या में लोग लगे हैं घोसी तहसील में काफी संख्या में मछुआ समुदाय बाहुल्य क्षेत्र हैं मत्स्य बीज उत्पादन होने के साथ प्रशिक्षण होता तो मत्स्य उद्योग को बढ़ावा मिलता। मत्स्य विकास अधिकारी संतोष चौबे का कहना है कि वर्षों से मत्स्य बीज उत्पादन बंद है। वर्ष 2013-14 से प्रशिक्षण नहीं हुआ है। प्रशिक्षण के लिए बजट की मांग की गई है।
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