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जुटे पर्व की तैयारी में, खरीदारी तेज

Fri, 10 Mar 2017 11:41 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/मऊ
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नगर क्षेत्र के सहादतपुरा बाजार में सजी पिचकारी और रंग की दूकानें।
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होली पर्व की तिथि जैसे-जैसे नजदीक आ रही है वैसे खरीदारी तेज हो गई है। नगर सहित प्रमुख बाजारों में देर शाम तक चहल पहल रह रही है। खाद्य पदार्थो की कीमत में खास बढ़ोत्तरी न होने से लोग उत्साहित हैं। उल्लास व उमंग के पर्व होली पर्व में तीन दिन ही शेष हैं, लेकिन महिलाएं तरह-तरह के पकवान बनाने के लिए अभी से खरीदारी करने लगी हैं।
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   त्यौहार के मद्देनजर खरीदारी करने वाले लोगों की उमड़  रही भीड़ की वजह से नगर के सहादतपुरा, मुंशीपुरा, चौक, मिर्जाहादीपुरा सहित जिले के प्रमुख बाजारा में पूरे दिन चहल-पहल बनी रह रही है। पिछले वर्ष के मुकाबले खाद्य पदार्थो की कीमत में खास बढोत्तरी न होने से लोग उत्साहित दिख रहे हैं। मैदा, बुरादा की कीमत में केवल बढ़ोत्तरी हुई है। सहादतपुरा स्थित एक किराना स्टोर के दूकानदार शंकर प्रसाद का कहना है कि खाद्य सामग्रियों के दामों में खास उछाल नहीं आया है। बिक्री ज्यादा होने की उम्मीद है।  वहीं जिला मुख्यालय से लेकर सभी कसबों और बाजारों में चीन की बनी पिचकारियों से पटी हैं। केवल पिचकारियां ही नहीं होली के मस्तानों द्वारा पहनी जाने वाली रंग- बिरंगी टोपियां भी चीन की ही बिक रही हैं। होली के अवसर पर प्रयोग की जाने वाली वस्तुओं में सूखे मेवे को छोड़कर लगभग सारे सामान चीन के ही बने हुए हैं।

 बाजारों में प्लास्टिक की अलग- अलग आकार और आकर्षक रंगों में पिचकारियां बिक रही हैं। कुछ पंप वाली साधारण पिचकारियां हैं तो कुछ बंदूकों और तोपों के आकार वाली पिचकारियां हैं। इनके दाम 20 रुपयों से लेकर 460 रुपयों तक हैं। अबीर और गुलाल भी हैं कुछ सुगंधित तो कुछ बिना सुगंध वाले। हालांकि अबीर और गुलाल कुछ स्वदेशी भी हैं इसी प्रकार रंग भी स्वदेशी हैं, सहारनपुर से लेकर भोपाल तक के। लेकिन गुझिया बनाने वाले फरमा से लेकर अन्य सामान भी चीन के ही बने हैं। होली के दिन पहनी जाने वाली टोपियां भी चाइना की बनी हैं जो दूकानों की शोभा बढ़ा रही हैं।
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  दूकानदार प्रदीप कहते हैं कि पीतल और स्टील की देशी पिचकारी एक बार खरीदने पर सालों तक चलती रहती थी। उसकी कीमत अधिक अधिक है, लेकिन अब चाइनीज माल के आगे उसके ग्राहक ही नहीं हैं।   हालांकि चाइनीज माल टिकाऊ नहीं हैं, पर सस्ते हैं इसलिए ग्राहक उन्हें पसंद करते हैं। दूकानदार अरविंद का तर्क है कि चूंकि चाइना के माल स्वदेशी उत्पादनों की अपेक्षा सस्ते होते हैं इसलिए लोग उसे प्राथमिकता से खरीदते हैं। इसीलिए इस बार पिछले साल की तुलना में ड्योढ़ा माल मंगाया है। इनकी बिक्री भी अधिक हो रही है ,उम्मीद है सारा माल बिक भी जाएगा। लेकिन इनके विपरीत रामचंद्र त्रिपाठी ,सुरेश यादव , शिवशंकर सिंह सरीखे बहुत से ऐसे लोग भी हैं जो स्वदेशी से प्यार करते हैं। इन लोगों ने बताया कि वे होली पर एक भी सामान चीन का बना नहीं खरीदेंगे। वे तो बच्चों के लिए पिचकारियां, रंग, अबीर और गुलाल स्वदेशी ही खरीदेंगे।
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