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पशुओं के लिए बनाए गए इंडोर वार्ड में दुकानदारों ने बना दिया गोदाम

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अमिला स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय में स्थित पशुओं के कमरे पर दुकानदारों का कब्जा। - फोटो : MAU
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कस्बा के बाबा थानीदास राष्ट्रीय राज मार्ग स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय में छह माह से पशु चिकित्साधिकारी का पद रिक्त चल रहा है। अस्पताल चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के भरोसे संचालित हो रहा है। पशु अस्पताल में पशुओं के लिए बनाए गए इंडोर वार्ड में दुकानदारों ने हार्डवेयर का स्टोर रूम बना लिया है। सब कुछ जानकर विभागीय अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
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कस्बा के बाबा थानीदास राष्ट्रीय राज मार्ग स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय में पशु चिकित्साधिकारी का पद रिक्त चलने से पशुपालकों को अपने पशुओं का इलाज कराने के लिए भटकना पड़ता है। विभाग की तरफ से घोसी स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय के प्रभारी पशु चिकित्साधिकारी को संबद्ध तो किया गया है। हालत यह है कि पशु चिकित्साधिकारी का छह माह से अमिला आए ही नहीं हैं। पशु अस्पताल में पशुओं के लिए बनाए गए वार्ड में कुछ लोगों द्वारा हार्डवेयर का गोदाम बना दिया गया है। पशुपालकों के अनुसार विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से ही यह काम चल रहा है। इस संबंध में क्षेत्र के पशुपालक दयाशंकर राय, बेचू राजभर, रामरतन सिंह, विवेक राय का कहना है कि जब भी पशु बीमार पड़ते हैं तो पशु चिकित्सक नदारद रहते हैं। पशुओं के इलाज के लिए बनाए गए इंडोर वार्ड को विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से आसपास के दुकानदारों का स्टोर रूम बना दिया गया है।
इस बाबत प्रभारी पशु चिकित्साधिकारी डॉ. पीडी सिंह का कहना है कि पशु अस्पताल में पशुओं के लिए बनाए गए इंडोर वार्ड में कतिपय दुकानदारों ने हार्डवेयर को स्टोर रूम बनाने का मामला संज्ञान में नहीं है। हम तो विधानसभा चुनाव और विभागीय कार्यों के चलते गत छह माह से पशु अस्पताल गए नहीं हैं।
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छह माह से रिक्त चलरहा पशु चिकित्साधिकारी का पद
कस्बा के बाबा थानीदास राष्ट्रीय राज मार्ग स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय में छह माह से पशु चिकित्साधिकारी का पद रिक्त चल रहा है। अस्पताल चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के भरोसे संचालित हो रहा है। पशु अस्पताल में पशुओं के लिए बनाए गए इंडोर वार्ड में कतिपय दुकानदारों ने हार्डवेयर का स्टोर रूम बना लिया है। सब कुछ जानकर विभागीय अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
कस्बा के बाबा थानीदास राष्ट्रीय राज मार्ग स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय में पशु चिकित्साधिकारी का पद रिक्तचलने से पशुपालकों को अपने पशुओं का इलाज कराने के लिए इधर उधर भटकना पड़ता है। बेहतर इलाज के अभाव में पशुओं के काल कवलित होने से पशुपालन व्यवसाय पर विपरीत असर पड़ रहा है।विभाग की तरफ से घोसी स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय के प्रभारी पशु चिकित्साधिकारी को संबद्ध तो किया गया है। हालत यह है कि पशु चिकित्साधिकारी का छह माह से अमिला आए ही नहीं हैं। इस संबंध में क्षेत्र के पशुपालक दयाशंकर राय, बेचू राजभर, रामरतन सिंह, विवेक राय का कहना है कि जब भी पशु बीमार पड़ते हैं तो पशु चिकित्सक नदारद रहते हैं। पशुओं का इलाज भगवान भरोसे हो रहा है। इस बाबत प्रभारी पशु चिकित्साधिकारी डॉ. पीडी सिंह का कहना है कि पशु अस्पताल में पशुओं के लिए बनाए गए इंडोर वार्ड में कतिपय दुकानदारों ने हार्डवेयर को स्टोर रूम बनाए जाने का मामला संज्ञान में नहीं है। हम तो विधानसभा चुनाव तथा विभागीय कार्यो के चलते गत छह माह से पशु अस्पताल गया ही नहीं।
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