मलिक टोला इमामबाड़े में मोहर्रम की पहली मजलिस में तकरीर करते मौलाना नसीमुल हसन। स्रोत- स्वयं
नगर के मलिक टोला स्थित इमामबाड़े में गम-ए-हुसैन (अ.स.) की याद में मोहर्रम के मुकद्दस महीने की पहली मजलिस का आयोजन बुधवार को अकीदत और एहतराम के साथ किया गया।
इस मौके पर बड़ी संख्या में अजादार और मोमीन उपस्थित रहे, जिन्होंने कर्बला के शहीदों को अपनी खिराजे-अकीदत (श्रद्धांजलि) पेश की। मजलिस की शुरुआत मर्सिया से हुई। इसके बाद मौलाना नसीमुल हसन ने मजलिस को खिताब किया।
उन्होंने कर्बला के वाकयात और इमाम हुसैन (अ.स.) के सब्र व इस्तकामत पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कर्बला का मैदान हक और बातिल के बीच का वह मोर्चा था, जहां इमाम हुसैन ने अपनी और अपने जानिसारों की कुर्बानी देकर इंसानियत और इस्लाम के बुनियादी उसूलों को हमेशा के लिए जिंदा कर दिया।
मौलाना की तकरीर सुनकर वहां मौजूद अजादारों की आंखें नम हो गईं। तकरीर के बाद माहौल पूरी तरह गमगीन हो गया। मजलिस के बाद अंजुमन बाबुल इल्म जाफरिया के नौहाख्वानों ने पुरदर्द अंदाज में नौहाख्वानी और सीनाजनी (मातम) पेश की।
अंजुमन के नौहे सुनकर पूरा इमामबाड़ा ‘या हुसैन-या हुसैन’ की सदाओं से गूंज उठा। मजलिस के समापन पर मुल्क में अमन-ओ-अमान, भाईचारे और तरक्की के लिए विशेष दुआ मांगी गई। इस मौके पर ताजियेदारों व मुतवल्ली सैयद अली अंसर, आसिफ रिजवी, मंसूर आजम, अयान, आमान, फैजी आदि मौजूद रहे।