सदर तहसील के पास बना नया राजकीय सम्प्रेक्षण गृह का भवन।
मऊ। जिले में बन रहे राजकीय संप्रेक्क्षण गृह का निर्माण कार्यदायी संस्था पैक्सपेड ने समय से पूरा नहीं किया। लेकिन नब्बे फीसदी काम पूरा होने पर सवा चार करोड़ रुपये का संशोधित स्टीमेट शासन को भेज और रुपयों की मांग की। जबकि वर्ष 2014 में भवन की पूरी लागत 2.59 करोड़ पास हुई थी, कार्यदायी संस्था ने 2.50 करोड़ रुपये खर्च भी कर दिए। संशोधित और बढ़े बजट का स्टीमेट भेजे जाने की जानकारी होने पर डीएम नाराज हो गए। उन्होंने पूरे मामले की जांच कराने का आदेश दिया। साथ ही दोषी के विरूद्घ रिपोर्ट दर्ज कराने को कहा।
जिले में राजकीय संप्रेक्क्षण गृह अब तक किराए के भवन में चलता है। इसके निर्माण के लिए वर्ष 2104 में पूर्व की सपा सरकार ने 2.59 करोड़ के प्रस्ताव को स्वीकृत कर धन अवमुक्त कर दिया था। इनमें से एक करोड़ रुपये उसी वर्ष निर्माणदायी संस्था पैक्सपेड को दे दी गई। शेष रकम में से डेढ़ करोड़ अगले वर्ष 2015 में संस्था को रिलीज की गई। निर्माण कार्य धीमी गति से चलता रहा। इस दौरान 90 फीसदी काम पूरा हो चुका है। फरवरी-2017 के अंत तक मुख्य भवन ,बोरिंग, मिट्टी भराई, विद्युत वायरिंग , बाउंड्री वाल निर्माण कार्य पूर्ण रंगाई पुताई ,गेट और चैनल गेट सब कुछ कंपलीट हो गया था। अब केवल सहायक अधीक्षक आवास का कुछ हिस्सा के साथ सड़क से पहुंच मार्ग का काम बाकी है। इस काम को पूरा करने के लिए तत्कालीन डीएम निखिलचंद्र शुक्ला ने शेष बची रकम नौ लाख सात हजार 220 रुपये को अवमुक्त करने के लिए शासन को पत्र 21 सितंबर 2016 को भिजवाया। लेकिन बीच में अचानक कार्यदायी संस्था ने संप्रेक्क्षण गृह को पूरा करने के लिए सवा चार करोड़ का रिवाइज स्टीमेट जिला प्रोबेशन अधिकारी को दे दिया। जिला प्रोबेशन अधिकारी ने 20 मार्च 2017 को इस स्टीमेंट को सीधे महिला कल्याण निदेशालय लखनऊ को भेज दिया। बुधवार को जिलाधिकारी ऋषिरेंद्र ने कलेक्ट्रेट में आयोजित 50 लाख रुपयों की लागत से अवरुद्घ पड़े निर्माण कार्यों की समीक्षा करने के दौरान इस अनियमितता को पकड़ा। 2.59 करोड़ के स्थान पर सवा चार करोड़ रुपये के रिवाइज स्टीमेट को देखकर डीएम चौंक गए। उन्होंने इसकी जांच पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता को सौंपी । जांच मेंदोषी मिलने पर संस्था या जिला प्रोबेशन अधिकारी के विरूद्घ रिपोर्ट दर्ज कराने का भी आदेश दिया। जांच करने वाले अधिकारी ने इस बाबत कार्यदायी संस्था के अधिशासी अभियंता आजमगढ़ से जवाब तलब किया है।