जिले के माध्यमिक विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को नए शिक्षा सत्र में खाद्य और अखाद्य का महत्व बताते हुए टिफिन में पौष्टिक खाद्य लाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इसके लिए ‘नो जंक फूड’ नीति को प्रभावी किया गया है, जिसे माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से जारी शैक्षिक कैलेंडर में शामिल किया गया है।
जिले के 519 माध्यमिक विद्यालयों में 2.26 लाख छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। नए शैक्षणिक सत्र से विद्यार्थियों के स्वास्थ्य में सुधार के लिए यह पहल की गई है। ‘नो जंक फूड’ नीति के तहत विद्यालयों में जंक फूड लाने और खाने पर मनाही रहेगी तथा बच्चों को घर से पौष्टिक टिफिन लाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
नए शैक्षणिक कैलेंडर में विद्यार्थियों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी गई है। जंक फूड के बढ़ते चलन को देखते हुए निर्देश दिए गए हैं कि बच्चों में संतुलित आहार की आदत विकसित कराई जाए। इसके लिए प्रत्येक विद्यालय में एक शिक्षक को विशेष जिम्मेदारी दी जाएगी, जो विद्यार्थियों को खानपान और स्वास्थ्य के बीच संबंध समझाएंगे।
इसके तहत जागरूकता गतिविधियां चलाई जाएंगी, ताकि बच्चे स्वयं जंक फूड से दूरी बनाकर पोषणयुक्त भोजन अपनाएं। अधिकारियों के अनुसार, सभी विद्यालय प्रशासन को संतुलित डाइट चार्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसमें फल, हरी सब्जियां, दाल, दूध और अन्य पोषक तत्व शामिल होंगे। यह सूची अभिभावकों को भी दी जाएगी, ताकि वे बच्चों के टिफिन में पौष्टिक भोजन सुनिश्चित कर सकें।
इस संबंध में जिला विद्यालय निरीक्षक गौतम प्रसाद ने बताया कि नए शिक्षा सत्र में ‘नो जंक फूड’ नीति लागू करते हुए सभी माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को पत्र भेजा गया है। सही खानपान से विद्यार्थियों का स्वास्थ्य बेहतर होगा और पढ़ाई में उनकी एकाग्रता भी बढ़ेगी।