बढुआ गोदाम। सरायलखंसी थाना क्षेत्र के अदरी मोड़ के पास शुक्रवार की दोपहर हुई सड़क दुर्घटना में घायल युवक की शनिवार को इलाज के दौरान एक निजी अस्पताल में मौत हो गई। जबकि दुर्घटना के दिन ही महाकवि पंडित श्याम नारायण पांडेय के पौत्र की मौत हो गई थी। दो नौजवान युवकों की मौत से वीर रस के कवि के गांव डुमरांव में दूसरे दिन करुण क्रंदन से मातम छाया रहा। ग्रामीण पीड़ित परिवार को सांत्वना देने में लगे रहे। परदहां ब्लॉक के डुमरांव गांव निवासी महाकवि पंडित श्याम नारायण पांडेय के पौत्र रितेश पांडेय (30) पुत्र छविदेव पांडेय शुक्रवार को अपनी बाइक से गांव निवासी अपने दोस्त शमशेर बहादुर (33) पुत्र रामकृष्ण के साथ इंदारा स्थित एक निजी विद्यालय से पढ़ाकर वापस घर आ रहे थे। अभी वह सरायलखंसी थाना क्षेत्र के अदरी मोड़ के पास पहुंचे ही थे कि अचानक सामने से आ रही डीसीएम ने उनकी बाइक में जोरदार टक्कर मार दी। आनन-फानन में दोनों को 108 एंबुलेंस की मदद से जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां डॉक्टर ने रितेश को मृत घोषित कर दिया। वहीं शमशेर बहादुर की हालत गंभीर होने पर वाराणसी के लिए रेफर कर दिया था। जिसकी शनिवार की दोपहर इलाज के दौरान एक निजी अस्पताल में मौत हो गई। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
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एक की चिता ठंडी भी नहीं हुई दूसरे की चिता सजाने में लगे थे लोग
इंदारा स्थित एक निजी विद्यालय में पढ़ने जा रहे डुमरांव गांव निवासी रितेश पांडेय और शमशेर बहादुर पेशे से शिक्षक और मित्र थे। गांव के लोग एक नौजवान की चिता ठंडी होने के बाद दूसरे नौजवान की चिता सजाने की तैयारी कर रहे थे। बिलख रहे परिजनों को गांव के लोग सांत्वना देने में जुटे रहे। शमशेर बहादुर का आठ महीने का एक लड़का है जबकि चार साल की एक लड़की है। वहीं महाकवि पंडित श्याम नारायण पांडेय के पौत्र परिवार का होनहार लड़का था।
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गांव न तोे प्रशासनिक अमला पहुंचा और न ही कोई जनप्रतिनिधि
जिस वीर रस के कवि ने अपनी रचना से आजादी की लड़ाई के लिए लोगों के अंदर नई ऊर्जा का संचार किया था। उनके पौत्र रितेश पांडेय और उसके मित्र शमशेर बहादुर की मौत के बाद भी गांव में न तो कोई प्रशासनिक टीम पहुंची और न ही कोई जनपद का प्रतिनिधि। गांव के लोग इस दुख की घड़ी में एक दूसरे के कंधे पर सिर रखकर जख्म पर मरहम लगा रहे थे।