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Mau News: कार्तिक में सावन जैसी बारिश, सैकड़ों एकड़ धान की फसल बर्बाद

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मऊ। बृहस्पतिवार की रात से शुरू हुई बारिश शुक्रवार की सुबह तक होती रही। अक्तूबर महीने में हुई बारिश का 10 वर्ष का रिकॉर्ड टूट गया। 37 मिमी बारिश दर्ज की गई।कार्तिक में सावन जैसी बारिश हो रही थी। मोंथा चक्रवात के कारण हुई बारिश से जिले में सैकड़ों एकड़ धान की फसल बर्बाद हो गई।
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मौसम के अचानक बदलाव से ठंड बढ़ गई। बारिश से शहर के कई निचले इलाकों में जलभराव से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। तेज हवा के साथ हुई बारिश से खेतों में खड़ी सैकड़ों एकड़ धान की फसल गिर गई। लगातार चार दिनों से हो रही बारिश से खेती किसानी को बहुत नुकसान पहुंचा है। मौसम वैज्ञानिकों ने मोंथा का असर शनिवार से कम होने की संभावना जताई है। तापमान पर नजर डाली जाए तो शुक्रवार को अधिकतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस, न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस दर्ज क गई। 14 किमी की रफ्तार से हवा चल रही थी।
बृहस्पतिवार की रात से शुक्रवार की सुबह तक तेज हवाओं के साथ शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक बारिश होती रही। मौसम में अचानक बदलाव से ठंड और बढ़ गई। शुक्रवार को 37 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। बारिश से नगर के रघुनाथपुरा, मुंशीपुरा, निजामुद्दीनपुरा, भीटी, पावरहाउस कॉलोनी, जीवन राम छात्रावास में जलभराव से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। चार दिनों से खराब माैसम के चलते सैकड़ों एकड़ पकी धान की फसल गिर गई है। खेतों में चना, मटर, सरसो, आलू सहित अन्य फसलें पानी से डूब जाने से किसानों को लागत डूबने का खतरा बढ़ गया है। 10 वर्ष में पहली बार अक्तूबर में 111.50 मिमी बारिश रिकाॅर्ड की गई है। शुक्रवार की दोपहर तक बादल छाए रहे। भगवान भास्कर का दर्शन नहीं हुए। कृषि विज्ञान केंद्र पिलखी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. विनय कुमार सिंह का कहना है कि चक्रवाती तूफान मोंथा का असर शनिवार से कम होगा, जिसके बाद मौसम के साफ होने की उम्मीद है।
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कोपागंज : ब्लॉक में बृहस्पतिवार की रात हुई तेज हवा के साथ हुई बारिश से किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया। अचानक भारी बारिश और तेज हवाओं से क्षेत्र के 50 एकड़ खड़ी और कटी हुई धान की फसल बर्बाद हो गई। कई किसानों ने फसल काटकर खेतों में सूखने लिए रखी थी, लेकिन रात में हुई बारिश से फसल जलमग्न हो गईं। क्षेत्र के लेरोंदोनवार, भेलाबांध, कनियारीपुर, खुखुन्दवा, शहरोज समेत आसपास के गांवों के किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। क्षेत्र के किसान राम नवल राही, नरसिंह राय, उजागर प्रजापति, लालचंद राम, अवधेश राम, हरिशंकर गोंड, शंभू, रामेश्वर यादव और दयाशंकर यादव ने कहा कि तेज बारिश और हवा के चलते फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई। उन्होंने प्रशासन से सर्वे कराकर मुआवजे की मांग की है।
पिपरीडीह : मोंथा चक्रवात के कारण हस्पतिवार की रात से ही हो रही बारिश शुक्रवार सुबह तक होती रही। क्षेत्र के भार, ओन्हाईच, रैकवारेडीह, खरगजेपुर, पिपरीडीह, हासपुर, पतिला, उस्मानपुर, कुशमौर, सुवराबोझ सहित विभिन्न इलाकों में तेज हवा के साथ बारिश से धान की फसल खेतों में गिर गई। काट कर छोड़ी गई धान की फसल में पानी में डूब गई। व्यापक रूप से किसानों को क्षति पहुंची है।
इंदारा : क्षेत्र के विभिन्न गांवों में बृहस्पतिवार की रात शुरू हुई बेमौसम बारिश शुक्रवार सुबह तक होती रही। बारिश से क्षेत्र में बड़े पैमाने पर किसानों की धान की खड़ी फसल चौपट हो गई। रबी की तिलहनी फसलों के साथ-साथ सरसों, आलू, मटर समेत अन्य सब्जियों की खेती भी बेमौसम बारिश से बर्बाद हो गई। किसानों का कहना है कि बड़ी मेहनत और जमा पूंजी लगाकर धान की फसल तैयार की थी। जैसे ही फसल पकने बाद कटाई के लिए तैयार हो ही रही थी कि अचानक बारिश ने न केवल मेहनत को बर्बाद कर दिया। बल्कि जमा पूंजी भी सत्यानाश कर दिया। जो किसानों ने रबी फसलों की तैयारी में जुटे थे, उनकी तैयारियों पर बारिश ने पानी फेर दी। क्षेत्र के खेतों में लबालब पानी देख किसान दुखी हैं। वहीं कुछ किसान सुबह से खेतों में भरे बारिश के पानी निकालने का जद्दोजहद करते दिखे। क्षेत्र के किसान अखिलेश सिंह, मनोज सिंह, दयानंद पांडेय, शिवम सिंह, श्रीनाथ सिंह, वीर प्रकाश सिंह का कहना था कि धान की लहलहाती फसलें देख काफी उत्साहित थे। लेकिन बेमौसम बारिश ने हम सभी किसानों की धान की फसल जलमग्न हो गईं।
मधुबन। तहसील क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश से सड़कों पर जलभराव हो गया है। इससे आम लोगों को आवाजाही में परेशानी हो रही है। बेमौसम बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। लगातार बारिश से धान की कटाई और मड़ाई का काम ठप है। कई खेतों में पकी हुई फसलें गिरकर जमीन से चिपक गईं हैं, इससे नुकसान की आशंका बढ़ गई है। कई किसानों ने बताया कि उन्होंने मड़ाई के लिए धान काटकर खेतों में रखा था, लेकिन लगातार बारिश से धान के बोझ भीग चुके हैं। ऐसे में अब किसानों को बारिश थमने और मौसम साफ होने का इंतजार है।

रतनपुरा : क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में असमय हुई भारी बारिश से खेतों में खड़ी धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। खेतों में पानी भर जाने से पौधों के सड़ने का खतरा बढ़ गया है। सामाजिक कार्यकर्ता निसार अहमद ने फसल क्षति का आकलन कर मुआवजा देने की मांग की है।
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बारिश का आंकड़ा


वर्ष 2019 706.7 मिमी

वर्ष 2020 542.3 मिमी

वर्ष 2021 698.85 मिमी

वर्ष 2022 447.05 मिमी

वर्ष 2023 320.25 मिमी

वर्ष 2024- 445 मिमी

वर्ष 2025 440.85 मिमी
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