मऊ। बृहस्पतिवार को अप्रैल माह में बेमौसम बारिश से चार माह पहले ही सावन जैसा अहसास हुआ। दोपहर बाद तेज हवा के साथ गरज चमक के साथ झमाझम बारिश हुई। तापमान में जहां तीन डिग्री सेल्सियस की कमी दर्ज होने से लोगों को गर्मी और उमस से राहत मिली।
वहीं खेती किसानी पर ग्रहण लग गया है। खेत में खड़ी फसल गिर जाने और खेतों में पड़े गेहूं के बोझ भीग जाने से किसानोें के माथे पर चिंता की लकीरें देखी जा रही थी। बुधवार को दिन का तापमान 36 डिग्री था। बृहस्पतिवार को तापमान 33 डिग्री हो गया। कृषि वैज्ञानिक अभी दो दिन तक मौसम गरज चमक के साथ बारिश और ओला पड़ने की संभावना जता रहे हैं।
लगातार तीन दिन से पुरवा हवा चलने से वातावरण में नमी बन थी। बृहस्पतिवार को तड़के से ही आसमान में बादल छाए रहे। हल्की धूप के बीच धूप छांव होता रहा। दोपहर बाद मौसम ने एकाएक करवट लिया। आकाश में गरज चमक और तेज हवा के साथ झमाझम बारिश शुरू हो गई।
तेज आवाज के साथ बिजली चमकने और गरजने से लोग घरों में दुबक गए। रुक-रुक कर बारिश होती रही। तापमान पर नजर डाला जाए तो अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस, न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस रहा। आद्रता 60 प्रतिशत रही। जबकि 21 किमी की रफ्तार से हवाएं चल रही थीं। जबकि बुधवार को अधिकतम तापमान 36 डिग्री सेल्सियस, न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस रहा। आद्रता 41 प्रतिशत रही। 13 किमी की रफ्तार से हवा चल रही थी।
बारिश होने से मौसम खुशनुमा तो हो गया, लेकिन बरसात की वजह से खेत और खलिहानों में गेंहू, चना, मटर, सरसों आदि की कटाई और मड़ाई का कार्य ठप हो गया। जबकि चहुओर फसलों की कटाई और मड़ाई का काम जोर- शोर से चल रहा है। अगर बरसात इसी तरह होती रही तो किसानों को काफी नुकसान पहुंचेगा।
बारिश होने के कारण कीचड़ और कुछ जगह जलजमाव की स्थिति उत्पन्न हो गई। ग्रामीण क्षेत्रों में भी कहीं तेज, तो कहीं धीमी बारिश हुई।
खेतों में गेहूं की फसल की कटाई, बोझ बांधने तथा मड़ाई आदि का कार्य जोर-शोर से चल रहा था लेकिन बारिश होने से सब कुछ ठप हो गया। किसान चाहते थे कि जल्दी-जल्दी अनाज घर आ जाए, लेकिन एकाएक मौसम बाधक बन गया।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार बारिश से गेहूं की फसल पर अभी कोई असर नहीं पड़ा है। तेज हवा के साथ तेज बरसात होती है तो आम के फल और गेहूं की फसलों को नुकसान हो सकता है। तेज हवा से फसल गिर सकती हैं। इससे बालियां टूट सकती हैं।
कृषि विज्ञान केंद्र पिलखी के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. विनय कुमार सिंह का कहना है कि बारिश से फसलों के नुकसान होने का खतरा बना हुआ है। तेज हवा क साथ बरसात होती है तो अनाज पानी से फूल जाएंगे। उत्पादकता प्रभावित होगी। आम के टिकोरे भी गिर रहे हैं। दो दिन ऐसा ही मौसम रहने की संभावना है।