मऊ/ हलधरपुर। 11 करोड़ की लागत से बना रतनपुरा-भीमपुरा मार्ग ट्रक के गुजरते ही तीन फीट तक धंस गई। एफडीआर तकनीकी (फुल डेप्थ रिक्लेमेशन) से बनाई सड़क की कार्यदायी संस्था ने पांच साल की गारंटी दी थी, लेकिन अक्तूबर 2023 से अब तक यह सड़क चार बार अलग अलग जगहों पर धंस चुकी है। मामला संज्ञान में आने के बाद पैचवर्क करके जिम्मेदार अपनी औपचारिकता पूरी कर रहे हैं।
बताते चलें रतनपुरा ब्लॉक में रतनपुरा भीमपुरा सड़क वर्षों से बदहाल थी। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत अक्तूबर 2022 में सड़क के निर्माण का काम शुरू हुआ। अक्तूबर 2024 में सड़क बन कर तैयार हुई। नौ किमी लंबी पर सड़क को बनाने में 11 करोड़ रुपये का खर्च आया, एफडीआर तकनीक से बनी सड़क को लेकर जिम्मेदारों ने इसकी मजबूती को लेकर बड़े-बड़े दावे किए थे। लेकिन बनने के कुछ महीने बाद ही भीमहर चट्टी, बेलौझा बाजार के पास सड़क टूट गई। बीते बृहस्पतिवार को सड़क बारिश के बाद सेमराजपुर स्थित पेट्रोल पंप के पास करीब तीन फीट तक धंस गई। ट्रक को निकालने में दो घंटे का समय लगा। सड़क टूटने के बाद कार्यदायी संस्था ने अब तक क्षतिग्रस्त सड़क के हिस्से को दुरुस्त नहीं कराया है। सेमराजपुर निवासी शिवजी सिंह, पं जय गोविंद मिश्र, विक्रम सिंह, मनोज, रामविलास यादव, गुलाबचंद्र बरनवाल ने बताया कि डेढ़ साल पहले 11 करोड़ से सड़क बनाई गई थी।
100 गांवों को जोड़ती है सड़क
यह सड़क मार्ग मऊ और बलिया जिले के 100 गांवों को जोड़ती है। सड़क निर्माण को लेकर शुरू से ग्रामीण घटिया काम करने को लेकर विरोध जताते रहे, लेकिन जिम्मेदारों ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। ग्रामीणों ने बताया कि सड़क पर वाहनों की आवाजाही अधिक रहती है। इसके बाद भी सड़क निर्माण के दौरान गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया है। बताया कि दो जगहों पर सड़क टूटने पर आनन-फानन में भले ही पैचवर्क कराकर इसे दुरस्त कर लिया गया था। लेकिन सड़क के निर्माण में बेहद घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया।
जिले में एफडीआर तकनीक से बनी है 109 किमी लंबी सड़क
मऊ। ग्रामीण अभियंत्रण विभाग ने जनपद की 109 किमी लंबी 16 सड़कों को एफडीआर (फुल डेफ्थ रेक्लेमेशन) तकनीक से बनाकर तैयार किया है। 15 साल पुरानी बदहाल सड़कों के नवीनीकरण और चौड़ीकरण के लिए शासन से 123 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया था, इसी बजट में कार्यदायी संस्था को पांच साल तक सड़क की देखभाल करनी है। सड़कों के किनारे पेड़ और बिजली के खंभे हटाने के लिए वन विभाग और बिजली निगम को भी बजट आंवटित की गई थी। इनमें सबसे लंबी सड़क मऊ से इटौरा जाने वाली है, इसकी लंबाई 12 किमी है। रतनपुरा-भीमपुरा, मुहम्मदाबाद गोहना घोसी मार्ग से जीयनपुर, करहां से जहानागंज, सोहवल से मंडुसरा बुजुर्ग कयार जाने वाली सड़क सबसे महत्वपूर्ण है, जो मऊ को पड़ोसी जनपदों से जोड़ती है। कुछ ग्रामीण सड़कें ऐसी हैं जो पहले पगडंडी की तरह थीं।
क्या है एफडीआर तकनीक
इस तकनीक के तहत गिट्टी युक्त पुरानी सड़क को उपकरणों से उधेड़कर उसे बारीक टुकड़ों में तब्दील कर दिया जाता है। उखाड़ी गई सड़क की पपड़ी को रीसाइकिल कर सड़क पर बिछाकर समतल किया जाता है। सीमेंट में चिपकने वाले केमिकल को मिलाकर उसका घोल तैयार कर समतल किये गए हिस्से पर सतह के रूप में डाला जाता है। फिर इसे रीसाइक्लर और मोटरग्रेडर उपकरणों से रोल करने के बाद पैडफुट रोलर और काम्पैक्टर से दबाया जाता है। इसके बाद सात दिनों तक पानी दिया जाता है। फिर यातायात का दबाव झेलने के लिए सतह के रूप में स्ट्रेस एब्सार्बिंग इंटर लेयर तैयार की जाती है। इसके ऊपर पेवर मशीन से बिटुमिन कंक्रीट बिछाकर उस पर रोलर चलाया जाता है।