नगर के भीटी में चल रहे श्रीमद्भागवत गीता प्रवचन मेें अनूपानंद महाराज ने कहा कि भगवानभाव के वश में हैं। यदि भक्त भगवान को भाव से कुछ पुष्प भी समर्पित करता है भगवान उसे स्वीकार कर लेते हैं।
जब भगवान श्रीकृष्ण, कौरव, पांडव संधि के लिए हस्तिनापुर आए और दुर्योधन को समझाने लगे कि दुर्योधन तुम पांडवों को सिर्फ पांच गांव दे दो उनको राजू कर लूंगा दुर्योधन ने कहा कि बिना युद्ध के मैं किसी को भी सूई के नोक के बराबर भी नहीं दे सकता। प्रभु हमारे घर हमारी मां आपके लिए भोग बनाई है।
जब मां को पता चला कि पिताजी अंधे हैं तो मां भी अपने आंखों पर पट्टी बांध ली वही मां आपके लिए भोग बनाई है। भगवान ने कहा कि देखो दुर्योधन भोजन दो ही परिस्थितियों मेें किया जाता है या तो भूख लगा हो या खिलाने वालों के दिल में श्रद्धा हो। माफ करना हमें भूख भी नहीं लगी है।
आज तो बिदुर काका के घर निमंत्रण है और भगवान श्रीकृष्ण सीधे बिदुर के घर आए और विदुरानी से बोले काकी जी भूख लगी है बिदुरानी दौड़ती हुई केला लेकर आईं। भगवान के भाव में मगभन हो गईं।
केला के छिलके चखाने लगीं। भगवान बड़े प्रेम से खाने लगे। वह भूल गए कि मैं क्या खा रहा हूं। इस अवसरपर अशोक सिंह, इंद्रपाल सिंह, संतोष सिंह आदि शामिल थे।