मऊ। 25 दिसंबर को पंचायत का कार्यकाल समाप्त होते ही प्रधान और सेक्रेटरी फर्जी कार्य दिखाकर भुगतान करने में जुट गए। लेकिन सख्त प्रशासन की नजर में आने पर एक सेक्रेटरी के विरुद्घ मुहम्मदाबाद गोहना कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई गई, जबकि दूसरे गांव के प्रधान और सेक्रेटरी ने अतिरिक्त धनराशि को जमा किया। मुख्य विकास अधिकारी राम सिंह वर्मा ने बताया कि पकड़े गए दोषियों के विरुद्घ रिपोर्ट दर्ज कर रिकवरी की जाएगी। साथ ही अहरित धनराशि से तीन जनवरी तक कार्य गुणवत्ता के तहत पूर्ण कराना होगा। ऐसा न करने वालों के विरुद्घ भी कार्रवाई की जाएगी। मुख्य विकास अधिकारी राम सिंह वर्मा ने बताया कि तत्कालीन ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव ने मिलकर रमउपुर गांव में नाली निर्माण कराने के धनराशि निकाली गई थी। जांच में मामला सामने आने पर बृहस्पतिवार को प्रधान और सचिव से रिकवरी की गई। इस दौरान नाली निर्माण के नाम पर तीन लाख 93 हजार 68 रुपया निकाला गया था। लेकिन जांच में पाया गया कि काम सिर्फ एक लाख 88 हजार पांच सौ रुपये का हुआ है। ऐसे में तत्कालीन प्रधान और सचिव से तत्काल दो लाख पांच हजार 163 रुपया राजकीय कोष में तत्कालीन प्रधान/सचवि द्वारा जमा कराया गया। इसीक्रम में कोपागंज ब्लाक के मीरपुर रहिमाबाद गांव में विकास कार्य कराने के एवज में सचिव द्वारा 15 लाख रुपये का भुगतान किसी फर्म को किया गया। इसकी जानकारी होने पर सीडीओ ने इसकी जांच कराई। जांच में विकास कार्य संतोषजनक होना नहीं मिला। इस पर सीडीओ के आदेश पर सेक्रेटरी राजीव सिंह के विरुद्घ एडीओ पंचायत शीत कुमार ने मोहम्मदाबाद गोहना कोतवाली मे रिपोर्ट दर्ज कराई। बताते चले पैक फेड द्वारा परदहां ब्लाक के बगली पिजड़ा में बनवाए जा रहें पशु आश्रय स्थल में गुणवत्ता पूर्ण कार्य न करने पर ठेकेदार से 15 लाख रुपये की धनराशि राजकोष में जमा कराई गई। सीडीओ ने बताया कि इसके अलावा जो धनराशि कार्य के एवज में निकाली गई है, उससे गुणवत्तपरक कार्य तीन जनवरी तक पूर्ण करा लेना है। इसके बाद जांच में गड़बड़ी मिलने पर नियमानुसार रिकवरी की कार्रवाई की जाएगी।