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बोर्ड की वेबसाइट पर अपलोड होगा संसाधनों का डाटा

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मऊ। जिले के वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों के प्रबंधन को अब विद्यालय के संसाधनों को छिपाना आसान नहीं होगा। शासन ने संसाधनों की ऑनलाइन मैपिंग शुरू कर दी है। विद्यालयों के प्रबंधन को बोर्ड के वेबसाइट पर संसाधनों का डाटा अपलोड करना होगा। जिले में 436 वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालय हैं। कई में मानक के अनुरुप संसाधन न होने की शिकायत मिलती रही है। विद्यालयों पर आरोप लगते रहे हैं कि मैनेजमेंट कमेटी के चुनाव में पारदर्शिता नहीं बरती जाती है। शिक्षकों को मनमाने तरीके से निकाला जाता है। शिकायतों के मद्देनजर शासन ने वित्तविहीन विद्यालयों के संसाधनों की ऑनलाइन मैपिंग करानी शुरू कर दी है। उसने मैपिंग के लिए 12 से अधिक प्वाइंट तय किए हैं। विद्यालयों से जुड़ी हर छोटी बड़ी जानकारी मांगी है। मैपिंग में विद्यालयों में भवन, प्रयोगशालाओं, लाइब्रेरी, छात्र-छात्राओं की अलग-अलग संख्या, कार्यरत शिक्षकों की संख्या, मान्यता वर्ष, मान्यता प्राप्त विषय, शिक्षको की नियुक्ति का समय, प्रबंध समिति की स्थिति और चुनाव होने के समय की जानकारी समेत 12 से अधिक बिदुंओं की जानकारी रहेगी। सभी अपडेट सूचना बोर्ड की वेबसाइट पर अपलोड करनी है। जिले के वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों की दीवारों पर मान्यता वर्ष न लिखवाने पर जुर्माना लगेगा। शासन ने कथित फर्जी स्कूलों के संचालन पर लगाम लगाने के लिए निर्देश जारी किए हैं। माध्यमिक विद्यालयों को कुछ जानकारी विद्यालय की दीवार पर लिखवानी जरूरी है। विद्यालय को हाईस्कूल और इंटर की मान्यता किस वर्ष मिली हैउ इसका उल्लेख करना होगा। साथ ही विद्यालय में पढ़ाए जाने वाले विषय का पूरा विवरण भी दीवारों पर मोटे अक्षरों में लिखवाना होगा। ऐसा नहीं करने पर जुर्माना लगाया जाएगा। जिला विद्यालय निरीक्षक राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि मान्यता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय में संसाधनों का डाटा बोर्ड के वेबसाइट पर अपलोड किया जाना है। समस्त माध्यमिक विद्यालयों के प्रबंधकों को पत्र जारी कर दिया गया है।
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