जिले के सरकारी और सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में उपचारात्मक कक्षाएं चलाई जाएंगी। इन कक्षाओं के लिए उन कमजोर छात्र-छात्राओं का चयन किया जाएगा, जिन्हें विषय समझने में दिक्कत आ रही है।
यह प्रक्रिया हर विषय की कक्षा में की जाएगी, ताकि पढ़ाई में कमजोर बच्चे भी बेहतर तरीके से विषयों को समझकर अध्ययन कर सकें। जिले में 17 राजकीय और 67 सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय हैं।
नए शिक्षा सत्र में माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ाई में कमजोर छात्र-छात्राओं को अन्य विद्यार्थियों के समकक्ष लाने की कवायद तेज हो गई है। इसके लिए माध्यमिक विद्यालयों में उपचारात्मक कक्षाओं का संचालन किया जाएगा।
इस समय एक अप्रैल से नामांकन अभियान चल रहा है। 15 अप्रैल तक अभियान पूरा होने के बाद विद्यालयों में पढ़ाई में कमजोर विद्यार्थियों को चिह्नित करने की प्रक्रिया पूरी होगी।
विद्यालयों में उपचारात्मक कक्षाओं का संचालन करने से पहले विषयवार शिक्षकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण सत्र पूरा होने के बाद शिक्षक पढ़ाई में कमजोर छात्रों के लिए विषयवार उपचारात्मक कक्षाओं का आयोजन करेंगे।
इस बाबत जिला समन्वयक समग्र शिक्षा माध्यमिक, सीपी श्रीवास्तव ने कहा कि माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ाई में कमजोर विद्यार्थियों का चिह्निकरण कर उपचारात्मक कक्षाएं संचालित की जाएंगी।
25 फीसदी कमजोर विद्यार्थियों का होगा चयन
माध्यमिक विद्यालयों में उपचारात्मक कक्षाओं के लिए 25 फीसदी विद्यार्थियों का चयन किया जाएगा। कक्षा नौ से 12वीं तक के ऐसे विद्यार्थियों को शामिल किया जाएगा, जो अधिकांश समय कक्षा से अनुपस्थित रहे हों, बीमार रहे हों, जिनकी सीखने की गति थोड़ी धीमी हो, आत्मविश्वास की कमी हो या स्वयं का आकलन न कर पाते हों। अधिकारियों के अनुसार, उपचारात्मक कक्षाओं के लिए कक्षा नौ और दस में विज्ञान, गणित, हिंदी और अंग्रेजी विषय शामिल किए गए हैं, जबकि कक्षा 11 और 12 के लिए गणित, अंग्रेजी, रसायन विज्ञान, भौतिक विज्ञान और जीव विज्ञान को शामिल किया गया है।