पिछले कई दिनों से धूप तो दिन में निकल रही है लेकिन शाम होते ही सुबह तक गलन में तेजी से वृद्धि होती देखी जा रही है।
धूप के चलते दिन में तो लोगों को राहत मिल रही है लेकिन शाम होते ही गलन बढ़ने से सुबह तक जन जीवन प्रभावित होने लग रहा है।
ठंड को देखते हुए बाजारों में ऊनी कपड़ों की भी डिमांड बढ़ गई है। इसके चलते बाजारों में दिन में चहल पहल तो है लेकिन शाम होते ही बाजारों में सन्नाटा हो जा रहा है।
दिसंबर माह में ठंड ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। शाम ढलते ही कोहरे की चादर से आसमान घिर जा रहा है तो नौ बजे रात तक सड़कों पर वाहनों से चलना भी दूभर हो जा रहा है।
सबसे अधिक परेशानी गरीब तबके के लोगों को उठानी पड़ रही है जिनके पास ठंड से बचने के लिए ढंग के गर्म कपड़े नहीं हैं। वहीं किसान वर्ग के लोगों को भी ठंड में परेशानी उठानी पड़ रही है।
गेहूं की सिंचाई हो या फिर अन्य खेती बाड़ी का काम उन्हें सुबह शाम ठंड में ही किसी प्रकार हाड़ तोड़ मेहनत करनी पड़ती है। सुबह स्कूल जाने वाले बच्चों हो या उनके अभिभावक उन्हें तैयार करने में काफी कष्ट उठाना पड़ रहा है।
प्रशासन द्वारा अभी नगरपालिका क्षेत्र के सार्वजनिक स्थानों पर अलाव भी जलाए जाने की व्यवस्था नहीं हो पाई है। लोग अपने निजी संसाधनों से ही अलाव जलाने की व्यवस्था कर रहे हैं।
इसके चलते सुबह शाम सार्वजनिक स्थानों जैसे रोडवेज, रेलवे एवं प्रमुख स्थानों पर लोगों को ठंड से ठिठुरते देखा जा रहा है।