मंडलायुक्त आजमगढ़ की तरफ से कराई गई जांच में बीटीसी-2015 के बैच में नौ अभ्यार्थियों का एडमिशन फर्जी अंक पत्र के जरिए होना पाया गया। काउंसिलिंग के बाद अंकपत्रों और अभिलेखों का सत्यापन न कराए जाने से मऊ के प्राचार्य डायट की भूमिका संदिग्ध मिली।
प्राचार्य सहित छह की भूमिका संदिग्ध मिलने पर मंडलायुक्त कनक त्रिपाठी ने सभी के विरुद्घ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का संस्तुति पत्र शासन को भेज दिया। साथ ही बीटीसी में प्रवेश पाने वाले सभी अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की फिर जांच कराने का आदेश जारी किया। मंडलायुक्त ने बताया कि पूरी आशंका है कि पहले के वर्षों में भी इस तरह की धांधली की गई हो।
मंडलायुक्त कनक त्रिपाठी ने बताया कि शिकायत के आधार पर डायट मऊ में वर्ष 2015 के सत्र में बीटीसी में हुए प्रवेश की जांच कराई गई। इस दौरान वहां नौ अभ्यर्थियों के फर्जी अंकपत्र के आधार पर प्रवेश लेने का मामला सामने आया। जांच में पाया गया है कि बीटीसी बैच 2015 में प्रमोद यादव, सीमा यादव, रूबी यादव, रागिनी यादव, सोनम यादव, धर्मेंद्र यादव, अभय कुमार मौर्य, अंजली सिंह तथा गौरव सिंह को फर्जी अंक पत्र के जरिए दाखिला दिलाया गया।
मंडलायुक्त ने दुबारा नौ अभ्यर्थियों के अंकपत्रों की जांच कराने की संस्तुति की। साथ ही, डायट मऊ के प्रभारी प्राचार्य राजीव रंजन मिश्रा, उप प्राचार्य उदय प्रकाश मिश्र और रामचंद्र सिंह यादव, वरिष्ठ प्रवक्ता वीरेंद्र सिंह, शिव प्रसाद यादव और केशरी नरायन कपूर के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की संस्तुति कर शासन को पत्र भेजा है।