दोहरीघाट ब्लॉक के गोठा हनुमान गढ़ी पर राम कथा को श्रवण कराते रामाश्रय जी महाराज।संवाद
दोहरीघाट विकास खंड क्षेत्र के गोठा हनुमानगढ़ी मंदिर में दुर्गा प्राण प्रतिष्ठा, शतचंडी महायज्ञ के क्रम में चल रही राम कथा के पहले दिन बाल ब्यास रामाश्रय ने कहा कि रामचरित मानस संस्कारों की कथा है। सत्ता के त्याग की कथा है। महाभारत सत्ता के संघर्ष की कथा है।
राम की कथा चंद्रमा से भी शीतल है। सभी संशय को समाप्त करने वाली ही राम कथा है। संतों की वाणी घर घर पहुंचाने से भगवान प्रसन्न होते हैं। ईर्ष्या नहीं, स्पर्धा करो, ईर्ष्या की भांति इसमें दूसरों के गुणों या वैभव आदि के ह्रास का दुष्ट भाव मन पर नहीं पड़ता, बल्कि साधु उपायों से उनके समकक्ष बनने की सात्विक और प्रशंसनीय कामना होती है।
इससे मनुष्य की आत्मा अविकारमय होकर उन्नत होती है। उसके गुणी ओर यशस्वी होने में प्रेरणा और उत्तेजना मिलती है। उसके उद्देश्य साफ और महत्वपूर्ण होते हैं और संसार में उसके यश, वैभव और प्रतिष्ठा का अच्छा विस्तार होता है।