डोमनपुरा स्थित एमएए फाउंडेशन की ओर से आयोजित एक शाम शकील आजमी के नाम कार्यक्रम में बोलते शायर शकील आजमी।
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बॉलीवुड के युवा गीतकार तथा शायर शकील आजमी के सम्मान में सोमवार की रात एमएए फाउंडेशन डोमनपुरा परिसर में‘एक शाम शकील आजमी के नाम’ समारोह का आयोजन किया गया। इस दौरान शकील ने अपने कलामों से लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया और लोग वाह-वाह कर उठे।
शकील आजमी ने हाल दिल का उसे सुनाते हुए, रो पड़ा था मैं मुस्कुराते हुए..., भीगती जा रही थी एक लड़की, बारिशों में नशा मिलाते हुए सुना कर समां बांध दिया। इसके अलावा ‘बादलों की तरह बारिश की कहानी में रहो, तुम मेरा गम हो मेरे आंख के पानी में रहो’, ‘परों को खोल जमाना, उड़ान देखता है, जमीन पर बैठ कर क्या आसमान देखता है’, ‘खुद को इतना भी मत बचाया कर, गर बारिशें हों तो भीग जाया कर’ सुना कर देर रात तक महफिल को ऊंचाइयां दीं। शायर इमरान सागर ने ग़जल प्रस्तुत किया। डॉ. खालिद ने वह कौन है जो बचाता है मुझको लहरों से, मैं डूबता हूं तो तिनके से जोड़ देता है सुना कर वाहवाही लूटी। गायक अफजाल ने शकील आजमी के लिखे गाने को प्रस्तुत किया।
विशिष्ट अतिथि जमाल अर्पण ने कहा कि शकील आजमी जैसी बालीवुड की चर्चित हस्ती हम लोगों के बीच उपस्थित है। डॉ. मोहम्मद जियाउल्लाह ने कहा कि जुबान से निकले और दिल में बैठे ऐसी शायरी शकील आजमी ने सुना कर उर्दू अदब को एक अद्भुत नमूना पेश किया। कार्यक्रम की समाप्ति के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि वर्तमान समय में दर्शकों के हिसाब से फिल्में बन रही है। फिल्मों में अश्लीलता के सवाल पर कहा कि अश्लीलता का सबसे बड़ा पैमाना दर्शक है। ऐसी फिल्मों का आकलन करना चाहिए। इस अवसर पर सरफराज सिल्को, सईदुज्जफर, राशिद असरार, इम्तियाज नोमानी, मंजर कमाल, कमाल अख्तर रहे।